श्री गुरु अर्जुन देव महाराज जी का निर्वाण दिवस गुरबाणी और साखी के द्वारा मनाया गया

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सोमवार की संध्या को सत गुरु अर्जन देव महाराज जी की जीवनी उनकी भक्ति त्याग और बलिदान के बारे में बताया गया धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राणों का त्याग कर दिया। आज ही के दिन रावी नदी में उन्होंने ब्रह्म समाधि ले ली। पापियों ने कई अत्याचार किए लेकिन सतगुरु अपने धर्म पर मेरु पर्वत की तरह टिके रहे सर्व शक्तियां होते सिद्धियां होते भी उन्होंने प्रभु का विधान स्वीकार किया। उन्होंने ही श्री गुरु ग्रंथ साहब जी का संकलन किया और कई भक्तों की भी वाणी उनमें समाहित है सतगुरु जी की वाणी बड़ी ही सरस मधुर और हृदय पर प्रभाव डालने वाली है।

उनकी गुरबाणी गाई गई जिसमें संतो की महिमा का वर्णन था,, “महिमा साधु संग की सुनहु मेरे मीता। मैल खोई कोटि अघ हरे निरमल भए चीता।।” सतगुरु ने भक्ति की हरि नाम सुमिरन और कीर्तन की सतगुरु के सेवा की संतों की ब्रह्म ज्ञानी महात्मा की विशेष महिमा गाई है। इसके बाद श्री हरि नाम संकीर्तन के द्वारा कीर्तन का विश्राम हुआ। पिछले 2 वर्षो से निरंतर विशेष पर्व त्योहार उत्सव के अलावा प्रतिदिन सर्व श्रद्धालुओं के लिए भक्ति सत्संग कीर्तन का प्रचार ऑनलाइन अनवरत जारी है।

यह सेवा स्वामी श्री कृष्ण दास उदासीन जी के द्वारा बाबा आनंद राम दरबार चकरभाटा से बड़ी श्रद्धा भाव से की जाती है। दरबार साहब का लक्ष्य लोगों के हृदय में भक्ति सेवा प्रेम एकता जगाना है। हमारा देश न केवल दुनिया में बल्कि पूरे ब्रह्मांड में महान है जिसमें परमात्मा भी आकर अवतार लेते हैं इसलिए मनुष्य शरीर पाकर हमें निरंतर निष्काम भक्ति सेवा करनी चाहिए। आगामी निर्जला एकादशी 21 जून को ऑनलाइन ही मनाई जाएगी।

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