गोगड़ो पर्व सिंधी समाज ने सादगी से मनाया

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कोरोना बीमारी को देखते हुए सिंधी समाज ने गोगडो पर्व जो कि नाग पंचमी के दिन ही आता है। सादगी से साथ मनाया। यह पर्व सिंधी समाज सिंध प्रांत में थे तब से ही मानते अा रहे है। 1 दिन पूर्व ही रात को ही मिथो, लोलो चेहरी, कोकी रायता अन्य प्रकार की सब्जियां जिसमें करेला, सरसों का साग, मूली का साग, भिंडी की सब्जी बनाई जाती है। यह खाना दूसरे दिन गोगड़ो पर्व के दिन खाया जाता है। उस दिन गर्म भोजन नहीं पकाया जाता है।

एक दिन पूर्व का पका हुआ ठंडा भोजन खाया जाता है। माता शीतला, भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है। सिंधी समाज की महिलाएं सिंधी गुरुद्वारा में जाकर पूजा-अर्चना करती है साथ ही घर में सभी सदस्यों को शंडा लगाया जाता है मान्यता है कि शंदा लगाने से दुख, दर्द दूर हो जाते हैं माता शीतला का आशीर्वाद भी मिलता है। बड़े से तसले में बैठाया सीधे पांव के नीचे में सिक्का रखा जाता है सर के ऊपर छलनी रखी जाती है एक कुंवारी कन्या को बुलाया जाता है फिर एक कटोरी में कच्चा दूध, चावल डाला जाता है और कुंवारी कन्या उस दूध को छलनी ऊपर डालती है

जो हमारे शरीर में पूरा दूध सिर के माध्यम से नीचे गिरता है फिर एक लोटा पानी डाला जाता है उसके बाद वह सिक्का निकालकर कुंवारी कन्या को दिया जाता है। वह दूध बरतन ने में जमा होता है उसे नदी में जाकर डाला जाता है। साथ में मीठा लोला डालते हैंं। उसे डालते समय कहते है कि हे माता शीतला व भगवान झूलेलाल से सभी की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जाती है। यह पर्व सावन के माह में आता है बिलासपुर शहर में भी सिंधी समाज की महिलाओं ने यह पर्व श्रद्धा- भक्ति के साथ मनाया।

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