नवरात्रि में पढ़े मां डिडिनेश्वरी मंदिर की महिमा, जाने मंदिर का इतिहास

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त्तीसगढ़ में देवी मंदिरों का इतिहास बहुत प्राचीन है। प्रदेश के कोने-कोने में देवी मां अलग-अलग रूप में विराजमान है। उन्हीं में से एक है आदिशक्ति मां डिडिनेश्वरी। डिडिनेश्वरी देवी मां का मंदिर बिलासपुर से 35 किलोमीटर दूर स्थित मस्तूरी तहसिल के मल्हार गांव में है।

माना जाता है कि मां डिडिनेश्वरी आदिशक्ति का पार्वती रूप है। इनके दरवाजे में आने वाले प्रत्येक भक्त की मुराद पूरी होती है। मां अपने दरबार से किसी को भी खाली हाथ नहीं भेजती है।

यह मंदिर ऐतिहासिक है और इस मंदिर में विराजमान माता का अलौकिक रूप प्रदेश ही नहीं देश-विदेश में भी प्रख्यात है। इस लेख के माध्यम से आदिशक्ति मां डिडिनेश्वरी माता के मंदिर के इतिहास व इस मंदिर के विषय में विस्तार से बताएंगे।

शुद्ध काले ग्रेनाइट से बनी मां डिडिनेश्वरी की प्रतिमा लोगों की आस्था का केन्द्र है। हजारों लोग मां डिडिनेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचते है। मान्यता है कि यहां आने वाले भक्त माता का दर्शन बस कर ले तो उनके दुःखों का निवारण हो जाता है।

मां पार्वती अपने बच्चों भगवान गणेश व कार्तिकेय के समान ही भक्तों को आशीर्वाद देती है। मल्हार में जहां यह मंदिर है वहां पर कई मंदिर व मंदिरों के अवशेष है।

मूर्ति कला का उत्तम नमूना

इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना गया है। यहां आदिशक्ति मां पार्वती रूप में विराजमान होकर भक्तों को आशीर्वाद देती है। काले ग्रेनाइट में मां पार्वती की सुंदर प्रतिमा अलौकिक है। इतिहासकार बताते है कि यह एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां पर माता का यह रूप है।

मंदिर का इतिहास

मंदिर का निर्माण 10वीं-11वीं ई में माना जाता है। मंदिर का निर्माण वहां के कल्चुरी शासक के द्वारा कराई गई थी। कल्चुरी राजाओं की अधिश्ठात्री देवी आदिशक्ति ही थी। इसलिए जहां-जहां भी इनका शासन रहा है वहां पर आदिशक्ति के सुंदर मंदिरों का निर्माण कराया गया।

जीर्णोद्धार हुआ है मंदिर का

मंदिर के विषय में वहां के स्थानीय निवासी डाॅ अभिषेक सिंह ठाकुर ने बताया कि मंदिर बहुत प्राचीन है। इसकी देखभाल मंदिर समिति के द्वारा की जाती है। मंदिर बहुत प्राचीन होने के कारण से टूटने लगा था जिसका जीर्णोद्धार कराया गया हैं

मंदिर के गर्भगृह के अलावा परिसर के चारों ओर जीर्णोद्धार के तहत निर्माण कराया गया है। इस मंदिर के विषय में अध्ययन करने विदेशों से भी लोग आते है। एक बार माता की इस प्रतिमा को असमाजिक तत्वों द्वारा चुराने का प्रयास किया गया था

तब गांव के लोगों ने शासन प्रशासन से गुहार लगाई और माता के प्रति अपनी आस्था को प्रकट करते हुए मूर्ति को खोंजने पर जोर दिया। तब लगभग एक माह बाद माता के प्रतिमा को वापस प्राप्त किया गया। तब से इसके प्रति भक्तों की आस्था और बढ़ गई है।

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कुल देवी है मां डिडिनेश्वरी

इस मंदिर में स्थापित मां डिडिनेश्वरी को कुल देवी की तरह ही ग्रामीण पूजते है। इस गांव के केंवट समुदाय इसे अपनी आराध्य देवी मानकर पूजन करता है। इस देवी के कृपा से सभी के संकट दूर हो जाते है।

यहां पर चैत्र नवरात्रि व शारदीय नवरात्रि में भक्तों का रेला दर्शन के लिए पहुंचता है। ज्योत प्रज्ज्वलित कर अपनी मनोकामना पूरी करने का आशीर्वाद लोग लेते है।

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