शांतिमय जीवन के लिए छोटी-छोटी बातों में इमरजेंसी नहीं लाना – जैन मुनि पंथक

0

बिलासपुर-एक बात ठीक से दिमाग में बैठा दो, कि पूरी जिंदगी में इमरजेंसी में रहना नहीं है । संपर्क में आने वाले लोगों की दिनचर्या देखें तो मालूम होगा कि कई लोग बिना किसी कारण के फालतू का टेंशन लेते हैं । जैसे कि जीवन में इमरजेंसी चल रही है । उक्त बातें टिकरापारा स्थित जैन भवन में ऑनलाइन चातुर्मास प्रवचन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने कहीं ।
उन्होंने कहा ऐसी इमरजेंसी की मान्यता के साथ जीने वाले लोग पारिवारिक प्रेम भाव, स्नेह भाव को अलिप्त हो जाते हैं और अपना खुद के सपने को भी साकार कर सकते नहीं है । अपनी बुद्धिमानी के साथ यह सफाई देते हैं कि सपने को साकार करने के लिए दिन में 15-16 घंटे काम करना होगा, नहीं तो काम पूरा नहीं होगा ।


एक महिला जो गृहणी थी । जिनके तीन लड़के थे जो पूरा दिन कहते रहती थी कि जब तक सभी लोग घर से बाहर ना जाएं घर का पूरा काम मैं कर ही नहीं सकती । ऐसी सोच के कारण वह टेंशन में और चिड़चिड़ी रहती थी । आखिर में डॉक्टर को उसका हाइपरटेंशन का इलाज करना पड़ा । जैसे महिला को कोई डरा धमकाकर यह कहता था कि आज घर के सारे काम पूरे हो जाने चाहिए और ऐसी सोच के कारण वह पूरा दिन इमरजेंसी में रहती थी । ऐसा माहौल बना देती थी । हालांकि ऐसी इमरजेंसी को किसी दूसरों ने कहा नहीं था । यह खुद उसकी सोच थी।


ऐसी छोटी-छोटी बातें और सोच से ही अपने सपने को पूरा करने के लिए इतना सीरियसली लेकर इमरजेंसी बना देते हैं । जिससे कि जो सुख हम भोग सकते हैं वह भी नहीं भोग पाते हैं । शांतिमय जीवन जीना हैं तो यह करना होगा कि विनम्रता से कबूल करें कि हर एक छोटी-छोटी बातों के लिए पूरा दिन की कार्यवाही को इमरजेंसी के रूप में करने की जरूरत नहीं है यदि कोई काम दिन में पूरा नहीं होगा तो वह भी जीवन में कोई रुकावट आने वाली नहीं है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here