हितग्राहियों की बैठक लेकर बता रहे पोषण के पांच सूत्र

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जांजगीर.चांपा. राष्ट्रीय पोषण माह 2020 को लेकर सभी जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा अलग.अलग तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

कहीं पोषण वाटिका बनाने की सीख दी जा रही है तो कहीं कृषक महिलाओं को पोषण के बारे में जानकारी देकर पोषण वाटिका तैयार करने बीच की किट दी जा रही है।

इसी कड़ी में कृषि प्रधान जिला जांजगीर.चांपा में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विभाग द्वारा इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांव में अलग.अलग मोहल्लों में जाकर हितग्राही महिलाओं के साथ चर्चा कर रही है और पोषण के 5 सूत्रों की जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ एवं निरोग रहने के बारे में बता रही हैं।

विभाग की कार्यकर्ता जानकी देवांगन ने अपने सचिवालय केंद्र ठठारी 4 के अंतर्गत गुरुवार को राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत हितग्राहियों की बैठक बुलाई और पोषण के 5 सूत्रों पर चर्चा की।

उन्होंने इस दौरान सुनहरे 1000 दिन पर चर्चा की और बताया कि गर्भवस्था से लेकर 24 माह तक के बच्चों के इस चक्र को यदि सुनहरे 1000 दिन के रूप में बनाना है तो हमें स्तनपानए खानपान की देखरेख सहित टीकाकरण, वजन की जांच, लंबाई, मोटाई,

पौष्टिक आहार पर पूरा ध्यान देना होगा। चर्चा के दौरान जानकारी देवांगन ने महिलाओं को बच्चों में पौष्टिक आहार कब से शुरू करेंए उन्हें क्या खिलाएंए कितना खिलाएं, कब.कब खिलाएं आदि विषय पर भी जानकारी दी।

इस दौरान एनीमिया प्रबंधन की भी जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि एनीमिया की रोकथाम कैसे करें। यदि हम मुनगा भाजी, गन्ना, दूध, चुकंदर, अनार, आयरन टेबलेट आदि का सेवन करते हैं तो एनीमिया से बच सकते हैं।

इससे हीमोग्लोबिन का स्तर भी बढ़ाया जा सकता है। चर्चा के दौरान डायरिया की बीमारी व उसकी रोकथाम के बारे में बताया गया। महिलाओं को जानकारी दी गई कि यदि

पौष्टिक आहार, ताजा भोजन, उबला पानी या क्लोरीन की गोली डालकर पानी पीने के साथ रसोई को स्वच्छ रखें, खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोएं साथ ही कोरोना के समय में तो बार.बार हाथ धोते रहें

तो हम डायरिया सहित कोरोना के संक्रमण से भी बच सकते हैं। इस दौरान उन्होंने गृहणी महिलाओं को स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के बारे में समझाइश दी और सावधानी रखें

सुरक्षित रहे स्वस्थ रहे कुपोषण से जंग सुपोषण के संग स्लोगन के साथ उन्हें इन बातों को अपने जीवन में ढालने का संदेश दिया।

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