सकारात्मक सोच के साथ करें हर कार्य ब्रम्हकुमारी मंजू

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बिलासपुर टिकरापारा. हम दिनभर में बहुत से कार्य करते हैं चाहे वह आसन.प्राणायाम हो, कर्मक्षेत्र पर कोई निर्णय लेने का कार्य हो, भोजन करना, कार्यालयीन कार्य या अन्य कोई भी कार्य हो,

हमें उस कार्य को करने से पहले मन में उस कार्य के प्रति सकारात्मक भाव लाना जरूरी है। आधी सफलता तो सकारात्मक सोच से ही मिल जाती है क्योंकि आधार मजबूत हो जाता है।

हम शारीरिक या मानसिक तकलीफ में जो विधि अपनाते हैं उसमें परिवर्तन की आवश्यकता है।

किसी भी रोग के लिए सबसे पहले सकारात्मक सोच के साथ राजयोग ध्यान, प्राणायाम, आसन, एक्यूप्रेषर, घरेलू चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा का प्रयोग करें। तत्पष्चात् आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, एलोपैथिक इलाज को रखें।

ज्यादातर यही होता है कि हम कुछ भी छोटी.मोटी बीमारी के लिए दवाइयां ले लेते हैं। इससे रोग प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है। जबकि हमारे किचन में या हमारे आसपास ही ऐसे उपाय होते हैं

जिससे वह हल्की.फुल्की बीमारियां दूर कर सकते हैं। हालांकि एक्सीडेंटल केस व इमरजेंसी चिकित्सा के लिए एलोपैथी चिकित्सा ही सर्वोत्तम है।

उक्त बातें सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन स्वास्थ्य शिविर . ष्बढ़ते कदम स्वास्थ्य की ओर को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रम्हकुमारी मंजू दीदी ने कही।

आज नए साधकों के अनुसार भस्रिका, कपालभाति एवं अनुलोम प्राणायाम की विधि सिखाई और कहा कि किसी भी अन्य प्राणायामों के समय न मिले तो कम से कम कपालभाति व

अनुलोम.विलोम प्राणायाम के लिए 15 से 20 मिनट जरूर समय निकालें। भोजन के आधे एक घण्टे के पश्चात् आप भस्रिका व अनुलोम.विलोम प्राणायाम कर सकते हैं, वज्रासन में बैठ सकते हैं बाकी अन्य आसन व प्राणायाम खाली पेट ही करें। अभ्यास करते समय खांसी, छींक आदि शरीर के किसी भी प्रकार के वेग को न रोकें।

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