कोरोना महामारी के दौरान भी घर-घर बैठकर सोशल मीडिया से राम कथा का श्रवण किया श्रद्धालुओं ने

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बिलासपुर.कोरोना के विकट समय मे पुरुषोत्तम मास में भगवान का धन्यवाद करते हुए जन-जन तक श्री राम कथा को पहुंचाने के लिए संजीव रीना श्रीवास्तव द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजन किया गया है।

श्री राम कथा के विश्राम दिवस आचार्य अमर शुक्ला ने शबरी के प्रसंग को प्रारंभ करते हुए राम के जाति धर्म के भेदभाव रहित करुणानिधान होने का परिचय दिया। वर्षों से माता शबरी प्रभु श्री राम के इंतजार में प्रतिदिन हर मार्ग में फूल बिछाती थी

कि पता नहीं किस मार्ग से भगवान उनको दर्शन देने आ जाए। क्योंकि उनके गुरु जाते समय कह कर गए थे की शबरी भगवान श्री राम स्वयं दर्शन देने तेरी कुटिया में आएंगे। जब रावण छल से सीता जी को हरण करके ले जाता है तो उन्हें ढूंढते हुए राम जी माता

शबरी के आश्रम में पहुंचते हैं और शबरी के प्रेम में प्रभु राम झूठे बेर तक खा लेते हैं और यह संदेश देते हैं कि भगवान सिर्फ प्रेम के भूखे हैं । रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जान निहारा रामकथा में हनुमान जी की सच्ची भक्ति और समर्पण भाव को व्यक्त किया गया

हनुमान जी ने भगवान राम के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम का परिचय दिया उनकी अपार लगन और भगवान के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा हमें सिखाती है कि अपने आराध्य के चरणों में बिना किसी संदेह के अपने आप को समर्पित कर देना चाहिए जब हम अपने आप को उस पर व्यापक के चरणों में समर्पित कर देते हैं

तभी हमें निर्माण या मोक्ष की प्राप्ति होती है और जन्म मरण से छुटकारा मिलता है तुम उसके सामने झुक जाओ वह तुम्हारे आगे दुनिया झुका देगा धर्म शास्त्रों के अनुसार रामायण का पाठ करने से पुण्य मिलता है

और पाप का नाश होता है लेकिन वर्तमान में संपूर्ण रामायण पढ़ने का समय शायद ही किसी के पास है और इतने विशाल ग्रंथ को देखकर ही हम घबराकर उसे पढ़ने की हिम्मत नहीं कर पाते ऐसे में महाराज जी ने व्यासपीठ से बताया कि एक मंत्र है

जिसका पाठ करने से संपूर्ण रामायण पढ़ने का फल प्राप्त होता है और दुख दूर होते हैं और प्रभु कृपा प्राप्त होती है राम शब्द अपने आप में ही एक महाशक्ति है।

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