संत कंवर राम साहिब जैसे भक्त कम होते हैं- संत राजेश लाल

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बिलासपुर.श्री झूलेलाल चालिहा महोत्सव के अवसर पर झूलेलाल मंदिर झूलेलाल नगर चकरभाटा में संत भक्त कवर राम साहेब के परपोते संत राजेशलाल का आगमन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत रात 10 बजे भगवान झूलेलाल व बाबा गुरमुख दास जी के फोटो पर माला पहना कर दीप प्रज्वलित करके की गई।

संत राजेश लाल ने अपने अमृतवाणी में संत भक्त कवर राम साहेब जी के जीवन के अनमोल वचनों को बताया , कि किस तरह छोटी सी उम्र में संत साईं सतराम दास जी के शिष्य बने और अपने गुरु की हर बात मानते थे कभी भी अपने गुरु से सवाल जवाब नहीं किया।

अपने गुरु के लाडले और प्यारे शिष्य बन गए गुरु सतरामदास जी ने भी कहा बेटा कंवर तू अपने साथ.साथ अपने गुरु का नाम भी गर्व से ऊंचा करेगा और उनकी बात 100 प्रतिशत सही निकली। वैसे भी संतों की वाणी में भगवान वास करते हैं संतों की वाणी से जो शब्द निकलता है वह पूरा हो जाता है।

एक बार भक्त कँवरराम साहेब संकट में फंस गए थे। एक गांव में भजन भक्त गा रहे थे एक औरत के छोटा सा बच्चा मर गया। किसी ने उसे बताया कि पास वाले गांव में संत जी आए हैं तुम जाओ और अपने बच्चे को उसे दे दो। वहीं इसे जीवित कर सकते हैं वो औरत पास वाले गांव पहुंची संत कवर राम दास जी से कहा कि मेरे बच्चे को लोरी दो।

जब उसने बच्चे को लिया और लोरी देने लगे कुछ समय बाद उन्हें एहसास हुआ कि बच्चा मृत है तो संत कवर राम साहेब अपने गुरु को याद करने लगे और भजन गाने लगे नाले अलख जे बेड़ो तार मुहिन्जो इस भजन के माध्यम से भक्त कँवरराम साहेब जी अपने गुरु को याद कर रहे थे और बता रहे थे कि वह किस तरह संकट में फंस गए हैं मुझे इस संकट से उबार ओ मेरे सतगुरु एक सच्चे भक्त की आवाज अपने गुरु के पास पहुंच गई। गुरु कृपा से वह बच्चा जो मृत था वो जिंदा हो गया और रोने लगा।

उसे नया जीवन मिल गया। बच्चे की माँ खुशी के मारे रोने लगी और संत के चरणों पर गिर पड़ी और सभी को बताने लगी कि संत ने मेरे मृत बच्चे को जिंदा कर दिया। सच्चा संत कभी भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करते हैं। वे अपनी भक्ति से कमाई हुई। शक्ति का उपयोग दीन दुखियों का दुख दर्द दूर करने व सेवा में करते हैं। ऐसे कई सारे प्रसंग संत राजेशलाल ने बताए।

जिसे सुनकर भक्तजन भाव विभोर हो गए। क्योंकि ऐसे कई सारे प्रसंग थे जो भक्तों को भी पता नहीं थे । संतों की अमृत वाणी सुनकर भक्तजन धन्य हो गए । साईं जी के द्वारा कुछ भक्ति भरे भजन गाए गए। जय जय नारायण-नारायण हरि-हरि जरवार वारो हरि-हरि…, कंवरराम प्यारो कंवरराम प्यारो…ऐसे भक्ति भरे भजन सुनकर भक्तजन भाव विभोर हो गए।

संत लाल साई जी के द्वारा संत राजेश लाल जी का फूलों की बड़ी माला पहनाकर स्वागत किया गया एवं शाल पहनाकर सम्मान किया गया। भाभी बरखा जसूजा के द्वारा भी फूलों का गुलदस्ता देकर साइ जी का स्वागत किया गया। विजय दुसेजा व जगदीश जज्ञासी के द्वारा भी संत जी का स्वागत किया गया।

संत जी ने दोनों को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर ग्वालियर मध्यप्रदेश से जावेद म्यूजिकल पार्टी के द्वारा भी भक्ति भरा कार्यक्रम पेश किया गया। उन्होंने भी अपने सिंधी और हिंदी गीतों ओर भजनों से भक्तों का मन जीत लिया। चालिहा आया है भगवान झूलेलाल का…., बाबा गुरमुखदास अपनी चादर में ढकना….,संतलाल साईं है प्यारा….,लाल झूले लाल झूले लाल झूले लाल…., ऐसे कई भजन गाए।

कार्यक्रम रात 10 बजे आरंभ हुआ वह 2 बजे समापन हुआ। कार्यक्रम के आखिर में आरती, अरदास की गई व पल्लव पाया गया। इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में बाबा गुरमुखदास सेवा समिति श्री झूलेलाल सेवा समिति झूलेलाल सखी महिला ग्रुप सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

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