ब्रम्हकमल पुष्प के दर्शन से मिलता है पुण्य, कोट सागर दुर्गा मंदिर परिसर में खिला यह पुष्प

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ब्रम्हकमल पुष्प् की खूबी तो हर कोई जानता है। इसके बारे में लोग सुने भी है लेकिन इसे देखने का अवसर बहुत ही कम मिलता है। यदि ऐसा कहा जाए कि इसे देखने का मौका एक जन्म में मिल जाए तो वह भी किस्मत की बात होगी। इसे देखने का मौका कोटा ब्लाॅक के ग्राम कोट सागर दुर्गा मंदिर के प्रांगण में लोगों को मिल रहा है।
यह दुर्लभ ब्रम्हकमल का पुष्प पिछले दो दिनों से रात में खिल रहा है। जिसके दर्शन करने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग मंदिर पहुंच रहे है। यह पुष्प रात के समय में ही खिलता है ऐसे में लोग रात के समय में कोट सागर स्थित दुर्गा मंदिर पहुंच रहे है। इस पुष्प की खास बात यह है कि यह रात को ही खिलता है और सुबह होते ही पुष्प की पंखुडी बंद हो जाती है। यह पुष्प बहुत ही पुण्यकारी है पुराणों में इस ब्रम्हकमल को ब्रम्हा जी का ही स्वरूप माना जाता है। इसलिए इस पुष्प के दर्शन के लिए लोग ललायित है और दर्शन करने पहुंच रहे है।

कोट सागर के दुर्गा मंदिर के विषय में जाने

कोट सागर का दुर्गा मंदिर रिटायर्ड आईजी केसी अग्रवाल के पूर्वजों ने बनवाया था। जहां पिछले 4 वर्षो से मंदिर के पुजारी रविन्द्र शर्मा के पास है। पांच वर्ष पहले इस पुष्प को रिटायर्ड आईजी केसी अग्रवाल ने भेजा था। ब्रम्ह कमल 14 साल पुराना है जिसे आईजी केसी अग्रवाल ने मंदिर में पांच साल पहले लगाया। जिसमें बुधवार की रात में 11 बजे के बाद से दो पुष्प एक साथ खिल गए।

ब्रम्हकमल पुष्प की खासियत

यह अत्यंत सुंदर चमकते सितारे जैसा आकार लिए मादक सुगंध वाला पुष्प है। ब्रम्हकमल को हिमालयी फूलों का सम्राट भी कहा गया है। यह कमल आधी रात के बाद खिलता है इसलिए इसे खिलते देखना स्वप्न के समान ही है। इसकी विशेषता यह है कि जब यह खिलता है तो इसमें ब्रम्ह देव तथा त्रिशूल की आकृति बनकर उभर आती है।
यह कमल 14 वर्ष में एक बार ही खिलता है इस कमल को ब्रम्हाजी का रूप माना गया है इस कमल को देखने से कोई भी मांगी हुई इच्छा पूरी हो जाती है। यह कमल सफेद रंग का होता है। जो दिखने में अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी है। दैवीय शक्तियों से परिपूर्ण यह खूबसूरत फूल है। इसका वैज्ञानिक नाम सश्योर ओवालाटा है। यह एस्टेरेसी कुल का पौधा है जिसके नजदीकी पौधे सूर्य मुखी, गेंदा, गोभी, कुसुम, भृंगराज आदि है। यह कमल के प्रजातियों की अपेक्षा पानी में नहीं बल्कि धरती पर खिलता है।

औषधीय गुण भी है इसमें

ब्रम्ह कमल के फूल में औषधीय गुण होते है। वनस्पति शास्त्रों के अनुसार ब्रम्ह कमल की 31 प्रजातियां होती है प्रारंभ में ये हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते थे पर अब लोग इन्हें घर में लगाने लगे है। हिमाचल प्रदेध में इसे दूधा फूल, कश्मीर में गलगल, श्रीलंका में कदुफूल और जापान में गेक्का विजन कहते है। दंत कथाओं के अनुसार गणेश भगवान के सिर की जगह हाथी का सिर लगाने के लिए इस फूल का प्रयोग किया गया था।

द्रौपदी ने भी प्राप्त किया था ब्रम्ह कमल

महाभारत में उल्लेखित है कि जब पांडव वनवास में थे तब द्रौपदी को ब्रम्हकमल देखने को मिला था वह बहुत ही आकर्षक था अत्यंत सुंदर व सुगंधित पुष्प को देखकर द्रौपदी ने इस पुष्प को लाने अर्जुन से कहा। अर्जुन ने इस पुष्प को द्रौपदी को दिया। इसे पाकर द्रौपदी को आध्यात्मिक शक्ति का अहसास हो गया था।

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