बाल कवियों ने गीत, कविताओ की प्रस्तुति से मोह लिया लोगों का मन

Children poets fascinated by the presentation of songs, poems
बाल कवियों ने गीत, कविताओ की प्रस्तुति से मोह लिया लोगों का मन

साहित्य एवं कला के लिए समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती की बिलासपुर इकाई द्वारा कल्पना कायरकर के संयोजन में ऑनलाइन बाल कवि सम्मेलन का आयोजन विश्वनाथ कश्यप, संयोजक संस्कार भारती बिलासपुर, राजेश सोनार अध्यक्ष संस्कार भारती बिलासपुर एवं विपिन वर्मा विभाग संयोजक कुटुंब प्रबोधन बिलासपुर के आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।

कोरोनाकाल में इस ऑनलाइन आयोजन को करने का उद्देश्य बच्चों को कला साहित्य के माध्यम से वर्तमान परिदृश्य से थोड़ा राहत दिलाना हैए ताकि बच्चे रचनात्मक कार्यो में समय व्यतीत करें। इस ऑनलाइन आयोजन में अतिथिद्वय राजेश सोनार ने कार्यक्रम की तारीफ करते हुए इस तरह के रचनात्मक आयोजन करते रहने की बात कही, ताकि बच्चों को आने वाले समय के लिए तैयार किया जा सके।

विपिन वर्मा जी ने नन्हे बालकलाकारो की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि इन्होंने अपनी प्रस्तुति से हमे अपना बाल्यकाल याद दिला दिया। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों का साथ देकर उन्हें प्रेरित करने की बात भी कही। शिरीष पागे ने भी आयोजन की प्रशंसा की कवियत्री पूर्णिमा तिवारी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

कार्यक्रम की शुरुवात परंपरानुसार शाम्भवी पागे द्वारा प्रस्तुत ध्येय गीत से हुआ। इस ऑनलाइन बाल कवि सम्मेलन में अंचल के 18 बाल कवियों ने हिस्सा लिया जिन्होंने रचनाएं पढ़ी। समृद्धि आशीष नानोति ने हम पंछी उन्मुक्त गगन से की संदेश परक प्रस्तुति दी। प्रसून काले ने गीत की प्रस्तुति दी।

नन्ही कलासाधिका आर्या जोगलेकर ने संदेश देते हुए रूढ़ियों को तोड़ दो बंधनो को मोड़ दो की प्रस्तुति दी। प्रिया अश्वनी ने सुबह-सुबह मुर्गे ने बोला कविता की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी, मैथली गोरे ने संस्कृत में श्लोक का वाचन कर सबका मन मोह लिया। अनिकेत कायरकर ने ना तुम दूर जाना ना हम दूर जाएंगे कि प्रस्तुति दी।

स्वर्णिम गुंडे ने माँ वीणापाणी की वंदना करते हुए सुंदर गीत की प्रस्तुति दी। नन्हे कवि अभ्युदय श्रीवास ने गुरु की वंदना करते हुए मन में हो सद्भावना, सच्ची हो हर मनोकामना, दुर्भावना से दूर रहना, हे गुरु तुमने सिखाया की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही लूटी,

अविनाश देसाई ने संगीतमय गीत की प्रस्तुति दी, सूर्यान्शु काले की प्रस्तुति तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो, तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो को सभी की खूब सराहना मिली, आकृति हलवे ने वर्तमान स्थिति ने रक्षा हेतु हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया। आयुष दुबे ने इतनी शक्ति हमें देना दाता मन का विश्वास कमजोर हो ना कि प्रस्तुति देकर वर्तमान स्थिति ने लड़ने की प्रेरणा दी।

नन्ही बालिका कुछु दुबे ने भी कविता की प्रस्तुति दी। अनया बेडकर ने हम होंगे कामयाब, ओ ओ मन में है विश्वास की प्रस्तुति देकर कोरोना लड़ने हेतु संदेश दिया। अद्वय बेडकर ने नन्हा मुन्ना राही हु, देश का सिपाही हु की प्रस्तुति दी। शाम्भवी पागे ने मधुर आवाज में ओ चंदा नील गगन के, तू आना संग गगन के की प्रस्तुति दी।

अंत में वंदे मातरम गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार बालमुकुंद श्रीवास ने किया। इस ऑनलाइन आयोजन को सफल बनाने में शिरीष पागे, भुनेश्वर चन्द्राकर, कल्पना कायरकर, अल्का यादव, पूर्णिमा तिवारी, प्रकाश बावरे, राजेश सोनार, बालमुकुंद श्रीवास, धनेश्वरी सोनी, संध्या शुक्ला का विशेष योगदान रहा।

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