छत्तीसगढ़ प्रदेश व्यंगकारो का स्थल -डॉ.विनय कुमार पाठक

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बिलासपुर.प्रयास प्रकाशन बिलासपुर के तत्वावधान में भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित रिषभ जैन के व्यंग संग्रह रंग-रंगीला प्रजातंत्र पर अंतरराष्ट्रीय वेब संवाद का आयोजन किया गया।

इस आयोजन में डॉ.सुधांशु शुक्ला प्रोफेसर वरसा विश्वविद्यालय पोलैंड के मुख्य आतिथ्य, डॉ.विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की अध्यक्षता एवं डॉ.व्यास मणि त्रिपाठी प्रोफेसर अंडमान निकोबार द्वीप समूह, डॉ.मुरारी लाल अग्रवाल प्रोफेसर आगरा एवं डॉ.मीना पांडे स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय दिल्ली के विशेष आतिथ्य में संपन्न हुआ।

डॉ.सुधांशु शुक्ला ने विवाद की शुरुआत करते हुए कहा कि संकल्पों और वादों का रंग वाला त्यौहार यह चुनाव है। इसमें लेखक ने साहित्य की इस विधा को तार्किकता के साथ शानदार तरीके से प्रस्तुत किया है।

अध्यक्षता की आसंदी से अपने उद्गार में डॉक्टर विनय कुमार पाठक ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश व्यंगकारों का स्थल है। यहां से रिषभ जैन के व्यंग संग्रह का प्रकाशन उल्लेखनीय उपलब्धि कही जाएगी।

पाठक ने रंग-रंगीला प्रजातंत्र की पैनी धार की प्रशंसा करते हुए भाषा पर उनके अधिकार की सराहना की और लोक साहित्य हास्य और व्यंग के अंतर को बारीकी से समझाते हुए। चोली दामन का साथ कहा।

मीना पांडे ने साहित्य में तीनों अभिधा, लक्षणा, व्यंजना को काव्य की विकास यात्रा के रूप में परिभाषित किया और जंग को व्यवस्था में जन्मता माना। साथ ही प्रतिमाओं की खोज और तेवर के साथ लिखे हुए व्यंग की प्रशंसा की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में चंद्रशेखर सिंह हिंदी विभागाध्यक्ष मुंगेली ने विषय प्रवर्तन करते हुए नए व्यंग कार्य के रूप में उल्लेखनीय ढंग से रिषभ जैन को रंग-रंगीला प्रजातंत्र की उपलब्धि के लिए बधाई दी वहीं व्यंग्यकार रिषभ जैन कि साहित्यिक यात्रा के विकास क्रम में शीर्षस्थ वर्ग कारों की रचनाओं से प्रेरित स्कूल जाने की घटना का खुलासा किया

अतिथियों की समीक्षा के साथ और निष्कर्ष आधार को प्रतिक्रिया के रूप में व्यक्त करते हुए रिषभ जैन के रूप में असीम संभावनाओं से संतोष जाहिर किया।

कार्यक्रम का कुशल संचालन और आभार पोस्ट सुमित कुमार द्विवेदी महाविद्यालय मुरारी लाल अग्रवाल के साथ को महान बताया और व्यंग को श्रेष्ठ सहित की जानकारी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में अनेक विद्वान शामिल हुए। कार्यक्रम की जानकारी बालमुकंुद श्रीवास ने दी।

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