छंदशाला परिवार ने मनाया स्थापना दिवस

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छंदशाला परिवार ने आज स्थापना दिवस सादगीपूर्ण माहौल मे मनाया। गौरतलब है कि पिछले वर्ष कोरोना काल में लुप्त हो रही छंदबद्ध रचनाओं को पुनर्जीवित करने और घर बैठे कुछ सीखने के उद्देश्य से वाट्सएप समूह बनाकर 25 मार्च को इसकी स्थापना की गई थी । जिसे एक बरस पूर्ण हो गए ।

छंदशाला के संस्थापक वरिष्ठ गीतकार विजय तिवारी और शिक्षाविद् साहित्यकार डॉ. सुनीता मिश्रा हैं । जिन्होंने साल भर के अभ्यास और सीखने सीखाने के इस प्रयास को अद्भुत बताया । संस्था को वरिष्ठ छंदकार बुधराम यादव ने संबोधित किया और आज के समय में छंद लेखन को प्रासंगिक बताया और विपरीत परिस्थितियों मे शुरू हुई इस शाला को सीखने के माध्यम के साथ साहित्य और साहित्यकारों के लिए मील का पत्थर कहा ।

भारतेंदु साहित्य समिति के अध्यक्ष और छंदशाला के मार्गदर्शक वरिष्ठ कवि विजय तिवारी ने कहा कि रचनाओं में व्याकरण के साथ लय प्रवाह और गेयता पर भी ध्यान देना जरूरी है । इसलिए छंदशाला मे समय समय पर रचना लिखने के पश्चात ऑडियो भी मंगाया गया ताकि त्रुटियों का त्वरित निराकरण किया जा सके क्योंकि लिखने से ज्यादा गाने में मात्राओं की गलती पता चलती है।

छंदशाला समूह छंद की बारीकियां सीखाने के लिए तत्पर है। जिसका एकमात्र उद्देश्य है साहित्य की प्राचीन धारा से सभी जुडें रहें । छंदशाला की संस्थापक और कवयित्री डॉ. सुनीता मिश्रा ने कहा कि साल भर पहले जब शिक्षा संस्थान बंद थे वैसे में छंदशाला के माध्यम से अपने विद्यार्थी जीवन को मैंने भरपूर जिया । सुबह से रात तक सीखना और लिखने का यह क्रम अद्वितीय और अद्भुत था । जहां दोहा सोरठा, चौपाई, रोला, उल्लाला, कुंडलियां आदि छंदबद्ध रचनाओं को सीखा और सीखाया क्योंकि छंदशाला मे सभी सदस्य शिष्य हैं और सभी आचार्य हैं ।

छंदों को सीखने के लिए मात्रा गणना जरूरी है और नियमों का पालन भी । विपरीत परिस्थितियों में घर मे रहकर समय के सदुपयोग के साथ अपने आपके आकलन का भी यह समय था । उन्होंने यह भी बताया कि बहुत जल्द साल भर मे लिखित सभी छंदबद्ध रचनाओं के प्रकाशन की भी योजना है। इस अवसर पर छंदशाला परिवार के सभी सदस्य उपस्थित थे और सभी ने अपने अनुभव साझा किया और स्वलिखित दोहों का सस्वर पाठ किया ।

कार्यक्रम में उषा तिवारी, मनीषा भट्ट, सुषमा पाठक, पूर्णिमा तिवारी, सुनीता वर्मा, रानी साहू, कामना पांडे, बसंत पांडे, केवलकृष्ण पाठक, ओमप्रकाश भट्ट, शैलेंद्र गुप्ता, रेखराम साहू, मयंकमणि दुबे, राजेंद्र तिवारी, हीरादास, पी.डी.वैष्णव सहित प्रबुद्ध साहित्यकार उपस्थित थे । कार्यक्रम का सफल संचालन गीतकार एवं कवि हरबंस शुक्ला ने किया

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