जप सिर्फ आध्यात्मिक ही नहीं मानसिक सुख प्रदान करता है, जाने इस विषय में

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हिन्दू धर्म में पूजन-अनुष्ठान में जप को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। लोग अपने आराध्य देव का नाम लेते हुए जप करते है। जप करना मनुष्य के लिए बहुत ही लाभकारी होता है।

पूजन की दृष्टि से जप करना एक पूजन विधि का हिस्सा होता है। लेकिन वास्तविक रूप से पुराणों में जप क्यो और किस लिए जरूरी है यह भी बताया गया है।

गरूड़ पुराण में जप से होने वाले लाभ व उसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इस लेख के माध्यम से अभिषेक मिश्रा ने जप के वास्तविक अर्थ को बताया गया हैं।

पहले जाने जप के प्रकार को

जप करने वाले जप तो करते है लेकिन जप के प्रकार के विषय में नहीं जानते है। जप के तीन प्रकार है इसमें पहला प्रकार वाचिक जप, दूसरा उपांशु जप व तीसरा मानसिक जप होता है।

वाचिक जप में धीरे-धीरे बोलकर जपकर्ता जप करता है। वहीं उपांशु जप में जपकर्ता के आवाज को कोई भी दूसरा व्यक्ति नहीं सुन सकता है। उसे उपांशु जप कहते है।

तीसरे प्रकार का जप मानसिक जप इसमें जप करते समय जपकर्ता के जीभ और होठ नहीं हिलते है। तीनों जप में मानसिक जप श्रेष्ठ है उसके बाद उपांशु जप और फिर वाचिक जप होता है।

जप करने से लाभ

जप करने से व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है। जप के दौरान किसी एक आराध्य देव का बार-बार नाम लेने से कुछ समय पश्चात व्यक्ति को उसकी सांसारिक चिंताओं का स्मरण नहीं रहता है और इस कारण से उसे स्वास्थ्य लाभ भी होता है।

अपने आराध्य के प्रति आस्था और विश्वास के कारण व्यक्ति की आत्मा प्रबल होती है और उसका मनोबल बढ़ता है। यह एक प्रकार का ध्यान भी है।

यदि कोई जप किसी मनोकामना के लिए व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ निरंतर करता है तो उसकी मनोकामनाएं भी पूरी होने लगती है।

जप कब करे

जप करने से फल निश्चित ही प्राप्त होता है लेकिन उसके लिए निरंतरता होनी आवश्यक है इसलिए पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ जप करते रहना चाहिए।

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