ममता, दयाभाव, परोपकार सेवा करने से जीवन में शांति मिलेगी. जैन मुनि पंथक

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बिलासपुर-आप अपनी अंतिम यात्रा का मानचित्र काल्पनिक चित्र तय करें । इस प्रकार का विचार बहुत लोगों को पसंद नहीं आएगा, परंतु यदि सार्वजनिक रूप से विश्व में सभी को लक्ष्य में लेकर सोचे तो बहुत लोगों के लिए असरकारक और फायदेमंद होगा । इसी सोच की वजह से अपनी बाकी जिंदगी बहुत सही तरीके से जी सकता है । उक्त बातें गुजराती जैन भवन टिकरापारा में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने अपने ऑनलाइन चातुर्मास व्याख्यान में कहीं ।


उन्होंने आगे कहा यदि हम अपनी बीती हुई जिंदगी के ऊपर नजर करें तो महसूस होगा कि हम कई बातों में चिचड़ा जाते थे। कई लोगों का अपमान, तिरस्कार, आर्थिक नुकसान, जलन, घृणा और दूसरों के सुखी संसार में फूट डाला है । लेकिन अभी ऐसी सोच है तो खेद प्रकट होगा और अब महसूस होता है कि हमें अपनी शक्ति, समय और संपत्ति का कितना दुरुपयोग किया है ।
ऐसी सोच जीवन के अंतिम समय में ही कुछ लोगों को ही आती है, और ऐसी सोच जिन्हें आती है वह अभी के बचे हुए जीवन में परिवर्तन लाकर खुद के आत्मा का कल्याण और दूसरों का भला होने वैसा परमार्मिक जीवन जीने के प्रति प्रयत्नशील बनेगा ।


हालांकि इस प्रकार का मानचित्र भयावह और दुखदायक महसूस होगा । लेकिन अपने आत्मा के लिए काफी लाभदायक हो सकेगा । अपना बाकी जीवन में माया, ममता, दया भाव, परोपकार सेवा जैसे गुणों को प्राथमिकता दे करके अपना जीवन व्यतीत कर के अपनी जिंदगी जीने के भाव प्रकट होगा, और फलस्वरुप जीवन में शांति प्राप्त होगी और जीवन पूर्ण होने पर सद्गति मिलेगी ।


समाज के कुछ बड़े बुजुर्ग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए आज गुरुदेव के दर्शन करने भवन पहुंचे । जहां गुरुदेव ने अपने मुखर वाणी से लोगों को धर्म लाभ देते हुए व्याख्यान दिया । गुरुदेव के नवकारसी एवं गोचरी गुलाब तेजाणी, मीना तेजाणी, तारा सेठ, नीता दामाणी, वत्सला कोठारी, संगीता दामाणी, शोभना सुतारिया, कुंदन कोठारी, रक्षा वेलाणी, आशा दोषी, रेखा वेलाणी, वंदना दोषी, शीला वेलाणी, पूजा, तरु देसाई को लाभ मिला ।

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