श्री राणी शक्ति दादी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मनाया गया वार्षिकोत्सव पर्व

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बिलासपुर. श्री राणी शक्ति दादी मंदिर बिलासपुर में वार्षिकोत्स पर्व रविवार को धूमधाम से पूजा-अर्चना करते हुए मनाया गया। सुबह से देर रात तक मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण व पूजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर को रंग-बिरंगे झालरों से प्रकाशित किया गया। सुंदर फूलों से सजाया गया।

मदिर के सचिव अजय अग्रवाल ने बताया कि मंदिर में जात. धोक पूजा सुबह 5 बजे से शुरू होकर संध्या तक भक्तों द्वारा की गई। श्री राणी शक्ति दादी की मंदिर संवत 1351 मंगसिर बड़ी नवमी दिन मंगलवार को दादी जी का शुभ विवाह श्री तनधन दास जी के साथ हुआ था।

और इसी दिन कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए शक्ति का आव्हान किया और अग्नि से प्रगट हो कर भक्तो को देवी स्वरूप दर्शन दिया ।श्री दादी मंदिर बिलासपुर में आज 7 फरवरी दिन रविवार को दोपहर 3 बजे से श्री नारायणी महिला मंडल बिलासपुर द्वारा आयोजित दादी जी की मंगल कथा हुई ।

जिसमें बताया गया कि महाभारत के समय जब अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त होते हैं तब उनकी पत्नी उत्तरा अत्यंत दुखी हो कर श्री कृष्ण के सामने अपने भविष्य की बात पूछती हैं तन श्री कृष्ण उत्तरा को बताते हैं कि तुम कालांतर में श्री नारायणी के नाम से जन्म होगा और तुम लोंगो का दुख दूर करोगी ।

तुम्हे सभी राणी शक्ति के नाम से आराधना करेंगे। मंगल पाठ में मुख्यतया श्री दादी जी की विवशबपश्चात जब बारात वापस जाने लगी तो रास्ते मे नवाब ने अपने भारी भरकम सैनिकों के साथ हमला किया । बहुत भयंकर युद्ध हुआ । युद्ध मे श्री तनधनदास जी वीरगति को प्राप्त हुए। तब माँ श्री नारायणी ने प्रचंड रूप धारण कर दैवीय शक्ति से सभी सैनकों और नवाब का संघार किया ।

पूर्व जन्म में उत्तरा के रूप में जन्मी माँ नारायणी ने अपने पति तनधन दस जी के साथ अग्नि में समाहित हुई । पुनः माँ ने शक्तिस्वरूपा के रूप में प्रकट हो कर सभी को दर्शन दिया ।

माँ के आदेश पर झुंझुनू राजस्थान में मंदिर बनाया गया । जहां आराधना कर भक्त जन अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करती है । विवाह के पूर्व मेंहदी, चुनरी व श्रृंगार की विधि करते हुए महिलाओं ने एक से बढ़कर एक भजन गाए। दादी जी को दोपहर तीन बजे मेंहदी लगाई गई

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