झुग्गी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास कर रही आंचल, कदम के माध्यम से कर रही कार्य

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Anchal is trying to connect the children of the slum area with education, doing work through the steps
झुग्गी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास कर रही आंचल, कदम के माध्यम से कर रही कार्य

महिला दिवस विशेष

वर्तमान समय में शिक्षा का क्या महत्व है सभी जानते है। हर कोई अपने बच्चे को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी से अच्छी शिक्षा देना चाहता है। आज जहां संघर्श का दौर चल रहा है वहीं इन सब के बीच शिक्षा के क्षेत्र में आंचल तेजाणी कदम ए स्टेप फाॅरवर्ड संस्था के माध्यम से झुग्गी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाते हुए समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य कर रही है।

कहते है कि बेटे को शिक्षित करो तो सिर्फ एक परिवार ही शिक्षित होता है लेकिन एक शिक्षित बेटी कई परिवार को शिक्षा देकर समाज के विकास में सहयोग देती है। इस बात को आंचल जैन साबित कर रही है। लगातार झुग्गी क्षेत्र के बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगाकर उन्हे शिक्षा का महत्व बता रही है। आंचल तेजाणी की यह कहानी महिला दिवस पर खास है। वह समाज में महिलाओं के लिए एक उदाहरण बन गई है।

छोटे उम्र में ही कर रही बड़ा काम

बड़ा कार्य करने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखता है। व्यक्ति की सकारात्मक भावना और बुलंद हौसले ही उसे बड़ा कार्य करने के लिए प्रेरित करते है। आंचल ने इस बात को साबित किया है और 22 साल की उम्र में ही कदम ए स्टेप फाॅरवर्ड संस्था के माध्यम से अशिक्षित बच्चों को शिक्षित करने का कार्य कर रही है।

हर बच्चे को करना चाहती है शिक्षित

सामाजिक कार्यकर्ता आंचल तेजाणी ने बताया कि वह हर बच्चे को शिक्षित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि समस्या भारत की सरकारी शिक्षा नीति में गहरी है और इसे कम करने के लिए संसाधनो का अभाव है। भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह कहा जा रहा है कि यह 24 की रिकॉर्ड उच्च संख्या रखता है, जो लगभग 100 मिलियन शहरी भारतीय हैं। यह जनता में विसंगति के स्तर को दर्शाता है जो सामाजिक विकास का लाभ उठाने में विफल रहता है ।

आंचल का जाने परिचय

आंचल तेजाणी 22 की युवा है। मई 2019 में आचल तेजाणी ने कदम ए स्टेप फॉरवर्ड नामक एक गैर-लाभकारी संगठन एनजीओ की स्थापना की। तब से प्लेटफ़ॉर्म अपने मिशन को प्राप्त करने में अधिक बढ़ गया। सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, छत्तीसगढ़ के स्लम बच्चों को शिक्षित करने की पहल की गई।

कदम को शुरू हुए लगभग ढाई साल हो चुके हैं। ढाई सालों में बीच के 1 वर्ष तक कोरोना की वजह से पढ़ाई नहीं हो पाई । इसकी पहचान और इसकी शरण में वर्तमान में 50 से अधिक छात्रों को स्कूली पाठ पढ़ाया जा रहा है। ये बच्चे झुग्गी क्षेत्रों के हैं।

वर्तमान कोविड- 19 के कारण वह छात्रों को कुछ समय ऑनलाइन पढ़ाना जारी रखा । अब पुनः नियमित रूप से कक्षाएं प्रारंभ की गई है । हाल में उन्हें झुग्गी के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में उनके योगदान के लिए बिलासपुर पुलिस बल और स्थानीय सरकार द्वारा कोरोना योद्धा के रूप में सम्मानित किया गया है।

ऐसे शुरू हुआ कदम ए स्टेप फारर्वड

आंचल ने बताया कि मैं एक दिन एक पास की झुग्गी में गई। जहाँ मैं कुछ बच्चों से मिली। उनके साथ बातचीत करने पर, मुझे पता चला कि भले ही वे 8 वीं कक्षा के छात्र थे, लेकिन वे बुनियादी गणित और अंग्रेजी वर्णमाला नहीं जानते थे।

मैंने जल्दी से पूछा आप एक सुसंगत वातावरण में क्यों नहीं सीख रहे हैं। जिस पर उन्होंने जवाब दिया, हम मुफ्त भोजन के लिए जाते हैं मैं हैरान हुई। मैने देखा झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चे इतने गरीब थे कि वे शायद ही प्रतिदिन एक भोजन का खर्च उठा सकते थे।

स्लम में रहने वाले हर व्यक्ति के भीतर लापरवाही इतनी गहरी होती है कि किसी को साक्षर होने की जरूरत का एहसास नहीं होता है। स्कूल जाने के बाद भी उन बच्चों की उचित देखभाल नहीं की जाती है। वे स्कूल छात्रों के लिए न तो आयु, उपयुक्त शिक्षण पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं और न ही प्रशिक्षित शिक्षक उन्हें प्रदान की जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता इतनी कम है कि यह संदेह बना रहता है कि क्या वे बड़े होकर एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक होंगे।

वर्तमान में, भारत एक युवा उभार के दौर में है। जो समावेशी आर्थिक विकास की प्रेरक शक्ति है। फिर भी 27 से अधिक भारतीय युवा शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से अलग हैं। मैंने इसे एक लक्ष्य बनाकर इस पर काम किया। मैंने अपनी मेहनत से कोशिश किया कि अगर मैं 50 बच्चों में से 5 बच्चों को भी भविष्य बनाने में सफल होती हो तो मेरे सपने साकार होंगे। इस तरह से एक-एक कदम बढ़ते हुए आगे बढ़ी।

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