एक गृह लक्ष्मी के खुद के तप के प्रभाव से अकबर बादशाह ने शुद्ध शाकाहार अपनाया -जैन मुनि श्री पंथक

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बिलासपुर चातुर्मास के पावन अवसर पर टिकरापारा स्थित गुजराती जैन भवन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि का प्रतिदिन व्याख्यान चल रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन प्रवचन से धर्म लाभ ले रहे हैं । गुरुदेव ने अपने व्याख्यान में बताया कि एक गृह लक्ष्मी के खुद के तप के प्रभाव से अकबर बादशाह ने शुद्ध शाकाहार अपनाया और अहिंसा प्रेमी बना दिया ।


महाराज साहब ने बताया कि एक दिन अकबर बादशाह ने शोर गूंजता हुआ सुना जैसे कि बैंड बाजाए हाथी घोड़े की शोर बहुत आदमियों की जय जय कार कि शोर सुना तो झरोखों में जा करके देखा तो एक महान जुलूस प्रसार हो रहा था । तपास करने से यह पता चला कि एक जैन धर्म की गृहस्थी महिला ने 6 महीने से एक महान तप उपवास किया है ।जिसमें कि सिर्फ उबला हुआ पानी ही पीना था और अन्न का त्याग था । बादशाह को संशय और जिज्ञासा होने पर वह खुद उस महिला जो कि हाथी के ऊपर पालकी पर बैठी थी उसे मिलने के लिए वहां गया और वह महिला का नाम चंपाबाई था ।

उसे पूछा कि यह जो छह माह का तप किए हैं संसय रुप पूछा क्या यह सही बात है तो महिला ने बताया कि हां यह देव गुरु कृपा से सत्य हुआ है संभव हुआ है ।
मेरे गुरुदेव जो की गुजरात में विराजमान है जिनका नाम पूज्य आचार्य श्री हीर सुरा विजय जी महाराज साहेब है । फिर बादशाह ने गुरुदेव को दिल्ली में आने के लिए और उनके दर्शन वाणी सुनने की इच्छा प्रकट की ऐसा समाचार गुरुदेव सुनकर अपने शिष्यों को दिल्ली जाने के लिए पाद विहार करके दिल्ली पहुंचने का आदेश दिया । सभी शिष्य दिल्ली में राज्य दरबार के प्रवेश द्वार तक पहुंच गए लेकिन अंदर प्रवेश नहीं करते हैं ।

तब राजा ने कहा कि अंदर प्रवेश क्यों नहीं करते गुरुवार तो शिष्यों ने बताया कि राज्य दरबार में अंदर गालीचा बिछा है इसलिए हम प्रवेश नहीं करेंगे क्योंकि गालीचा के नीचे चिट्टियां और सूक्ष्म जीव होने की संभावना रहती है जो कि हमारे जैसे ही जीव हैं और उन्हें भी जिंदगी प्यारी है मरना पसंद नहीं है ऐसा सुनकर राजा ने कहा कि ऐसा मुमकिन नहीं है या रोज साफ सफाई होती है किंतु गालीचा उठाकर देखा तो सचमुच वहां चीटियों की लाइन थी ।


साधुओं का जीव दया के लिए ऐसा आचरण देखकर और हर दिन का गुरु सत्संग सुनकर प्रभावित होकर खुद राजा ने मांसाहार का त्याग किया और अपने पूरे राज्य में किसी भी जीव का मांस भक्षण के लिए नहीं मारने का आदेश जारी किया। एक जैन महिला के माध्यम से संतो के समागम से गुरु वाणी से राजा में पतन हो गया और कई जीवो की रक्षा हो गई उन्हें अभयदान मिला ।

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