आखिर क्यों कहते है कि गोबर में मां लक्ष्मी का है वास, जाने विस्तार से

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हिन्दू धर्म में गौ माता को बहुत महत्व दिया जाता है। किसी भी पूजा-पाठ या फिर किसी भी अनुष्ठान में गाय के गोबर का इस्तेमाल करने की परंपरा है। इसे बहुत पवित्र माना जाता है। जिसे शुद्धता में सबसे श्रेष्ठ भी कहा जाता है।

कहते है जिस स्थान को नियमित रूप से गाय के गोबर से लीपा जाता है वहां धरती पवित्र रहती है और घर में लक्ष्मी का वास होता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि गौ माता का गोबर बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

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इस संदर्भ में पुराणों में भी उल्लेख है। 33 कोटी देवी देवताओं का वास गौ माता में माना जाता है। इस वजह से जो भी गौ माता की सेवा करता है उसको सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। किसी भी पूजा में गोबर का इस्तेमाल करने से सभी कार्य अच्छे से हो जाते है।

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यह है प्रचलित कथा

सभी देवी-देवताओं ने गाय के विभिन्न अंगों में अपना स्थान प्राप्त कर लिया है। इसके बाद देवी लक्ष्मी गाय के समक्ष आई। देवी लक्ष्मी ने कहा मैं तुम्हारे शरीर में वास करना चाहती हूं।

गौ माता ने लक्ष्मी से कहा मेरे शरीर के सभी अंगों पर देवताओं का वास हो चुका है। आप चाहे तो मेरे गोबर में वास कर सकती है। देवी लक्ष्मी ने गौ माता की इस बात को स्वीकार कर लिया और गोबर में वास कर गई।

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इसके बाद से ही गाय के गोबर को पवित्र और लक्ष्मी स्वरूप माना जाने लगा। मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करनी है तो गोबर से बने गौर गणेश की पूजा करे तो मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

गो मूत्र है औषधि

गौ मूत्र को आयुर्वेद और अन्य शास्त्रों में चिकित्सकीय महत्व बताया गया है। गौ मूत्र दर्द निवारक होने के साथ ही गुल्म, पेट के रोग, आनाह, विरेचन कम्र, आस्थापन, वस्ति आदि बीमारियों का नाश करता है।

आयुर्वेद में गौ मूत्र से कुष्ठ तथा अन्य चर्म रोगों का उपचार किया जाता है। श्वास रोग, आंत्रशोध, पीलिया भी गोमूत्र से नष्ट होते है।

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