सोशल मीडिया के माध्यम से आचार्य अमर शुक्ला सुना रहे भक्तों को श्रीमद् भागवत महापुराण

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बिलासपुर. श्रीमद्भागवत कथा आचार्य अमर शुक्ला द्वारा श्रीमद् भागवत महापुराण कथा सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धालुओं को सुनाया जा रहा है। कथा का आयोजन पंडित कन्हैया लाल हरिराम शर्मा के द्वारा किया गया है।

कथा के पहले दिन श्रीमद् भागवत महापुराण का महत्व बताया गया। साथ ही गौ कर्ण की कथा व प्रसंग को विस्तार से सुनाया गया। आचार्य पंडित अमर शुक्ला ने कहा कि जब हरि को जानने की इच्छा जागृत होती है उसी का नाम भागवत है।

अति हरि कृपा जाहि पर होई। पाउँ देइ एहिं मारग सोई अर्थात् जब तक राधा कृपा नहीं तब तक कृष्ण की कृपा नहीं। यह कथा तो वैकुंठ फलदायकं ।

जिस पर प्रभु की कृपा ही नहीं अति कृपा होती है वही इस मार्ग पर चल सकता है। भगवत कृपा के बिना भगवान के रास्ते पर भी कोई नहीं चल सकता। बिहारी जी की महफिल को बिहारी जी ही सजाते हैं और कथा पंडाल में वही आते हैं जिनको बिहारी जी बुलाते हैं।

महात्म्य का प्रथम श्लोक है। भागवत के प्रथम श्लोक में भी वयं नुमः कहा गया है और आखरी श्लोक में भी प्रणामो दुःखशमनस्तं नमामि हरिं परम्। कहां गया है अर्थात प्रणाम करने से दुख दूर होते हैं

भगवान के चरणों में हमारा कहीं भी कभी भी किया गया प्रणाम व्यर्थ नहीं जाता । हम किसी को भी प्रणाम करें वह प्रणाम हमारे इष्ट के चरणों में ही पहुंचता है । हम अगर कृष्ण को मानते हैं किंतु यदि हमने राम को भी प्रणाम किया है

तो वह प्रणाम राम के चरणों तक पहुंचेगा। किसी मस्जिद में भी अगर हमने अपने सर को झुकाया है प्रणाम किया है तो वहां झुकाया हुआ सर, प्रणाम भी हमारे इष्ट तक ही पहुंचेगा। ऑफिस में प्रयोग में आने वाली स्टाम्प होती है,

मोहर उसमें जो अक्षर लिखे होते हैं वह उल्टे होते हैं लेकिन जब हम उस मोहर को किसी पेपर पर लगाते हैं तो वह अक्षर सीधे हो जाते हैं । ऐसे ही हमारे माथे पर भी क्या पता विधाता ने कुछ उल्टी रेखाएं लिख दी हों और जीवन भी उलटी दिशा में जा रहा हो,

किंतु यदि हम गुरु और गोविंद के चरणों में मस्तक झुका देंगे तो हमारी उल्टी रेखाएं भी सीधी बन जाएंगी , हमारा जीवन भी सही दिशा में आगे बढ़ने लगेगा।

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