शिव महापुराण के मुताबिक ऐसे करे महादेव की पूजा, जाने विस्तार से

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हिन्दू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि का त्योहार 11 मार्च को है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक शिवरात्रि तो हर महीने आती है। लेकिन फाल्गुन माह की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहते है।

महाशिवरात्रि पर महादेव के साथ माता पार्वती की भी पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने परिवार में खुशहाली बनी रहती है। शिव महापुराण में महादेव की पूजा कैसे करे इसका उल्लेख है। इस लेख के माध्यम से महादेव की पूजा के विषय में बताएंगे।

1.तुलसी न चढ़ाएं शिवलिंग पर

हिन्दू धर्म में तुलसी का विशेष महत्व होता है। तुलसी को सभी शुभ कार्यों में प्रयोग किया जाता है। लेकिन भगवान शिव को तुलसी अर्पित करना वर्जित होता है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के शिवलिंग पर तुलसी अर्पित न करे।

2.शंख बजाना है शिव पूजा में वर्जित

भगवान शिव की पूजा में शंख का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के एक असुर का वध किया था जो भगवान विष्णु का प्रिय था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शिव पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित माना जाता है।

3.टूटा हुआ चावल शिवलिंग पर न करे अर्पित

भगवान शिव की पूजा में अक्षत यानी के साबूत चावल का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। कहते है कि टूटा हुआ चावल अशुद्ध होता है। इसलिए शिव जी की पूजा में टूटे हुए चावल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

4.नारियल पानी से न करे अभिषेक

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का अलग-अलग तरह के द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। लेकिन नारियल के पानी से महादेव का अभिषेक कभी भी न करे। नारियल को मा लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। जिसका संबंध भगवान विष्णु से होता है।

5. सिंदूर न करे अर्पित महादेव को

पूजन के दौरान गुलाल लगाना चाहिए। चंदन लगाना चाहिए। लेकिन कुमकुम नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि भगवान शिव को बैरागी माना जाता है। जबकि कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक होता है। इस लिए कुमकुम या सिंदूर को शिवलिंग पर नहीं अर्पित करते है।

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