एक ऐसा मंदिर जहां भाई-बहन नहीं जा सकते साथ, जाने पूरा इतिहास

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 36 किलोमीटर दूरी पर स्थित है मंदिरों की नगरी आरंग। यहां मंदिर बहुत अधिक संख्या में है। जिसके कारण इसे मंदिरों की नगरी के नाम से भी जाना जाता है।

इस जगह पर एक ऐसा मंदिर है भांड देवल। जहां पर भाई-बहन साथ नहीं जा सकते है। एक साथ प्रवेश करना वर्जित है।

एक हजार साल से अधिक पुराने इस मंदिर में महिलाओं ने कभी भी पूजा-अर्चना नहीं की है। इस लेख के माध्यम से हम विस्तार से इसके कारण को बताएंगे।

पुरातत्ववेत्ताओं और इतिहासकारों के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में हैहय वंशीय शासकों ने कराया था। भांड देवल जैन मंदिर है। इसके गर्भगृह में तीन तीर्थंकरों की कायोत्सर्ग मुद्रा वाली काले ग्रेनाइट से निर्मित मूर्तियां स्थापित है।

जहंा महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। पश्चिममुखी यह मंदिर ऊंची जगत पर स्थापित होने के साथ ही खंडित हो चुका है। पुरातत्ववेत्ताओं के मुताबिक नागर शैली से निर्मित भाण्ड देवल मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया है।

बीते कुछ वर्षों से यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा यह संरक्षित है। जब से इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया है। तब से किसी को पूजा-अर्चना नहीं करने दिया जाता। ऐसा कहा जाता है कि यह छत्तीसगढ़ का एक मात्र ऐसा मंदिर है। जहां पर महिलाओं को दर्शन-पूजन की अनुमति कभी नहीं मिली।

इस वजह से नहीं आते साथ भाई-बहन

आरंग के इतिहास के जानकारों के मुताबिक गर्भगृह में दिगम्बर जैन मूर्तियां, मंदिर की बाहरी दीवार पर आलिंगनरत मैथुन मूर्तियां उत्कीर्ण है। साथ ही गजावली, अश्वावली, हंसावली नृत्य-संगीत के दृश्य कीर्तिमुख आदि का अंकन है। इस वजह से भाई-बहन का एक साथ प्रवेश वर्जित किया गया है।

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  1. ईस लेख से मीली पुरातत्व के मंदिर की जानकारी

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