महादेव का एक अकेला मंदिर जहां पर है महादेव के जुड़वा शिवलिंग, पढ़े मंदिर का इतिहास

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महादेव के 12 ज्योर्तिलिंग के विषय में लोग जानते ही है। इसके अलावा भी महादेव के कई शिवालय है जहां पर अद्भूत व अनोखे शिवलिंग है जिसके दर्शन मात्र से ही जीवन का कल्याण हो जाता है। महादेव की कृपा भक्तों को मिलती है। उन्हीं में से एक शिवलिंग के विषय में बताएंगे जो संसार का अकेला मंदिर है जहां पर महादेव के जुड़वा शिवलिंग है।
इस लेख के माध्यम से हम इस अनोखे व अद्भूत शिवलिंग के विषय में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस मंदिर के इतिहास का भी वर्णन करेंगे। महादेव का यह शिवलिंग झारखंड के धौनी गांव में है। इस मंदिर की महिमा अपार है। इस मंदिर में एक बार जो भक्त महादेव की पूजा के लिए पहुंचता है उसके सभी दुख दूर होकर समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

शुम्भेश्वरनाथ है इस शिवलिंग का नाम

झारखंड के दुमका जिले के सरैयाहाट प्रखंड स्थित धौनी गांव में शुम्भेश्वरनाथ नाम से संसार का एक मात्र दुर्लभ अतिप्राचीन जुड़वा शिवलिंग स्थापित है। यहां के शिवलिंग की खासियत यह है कि यहां दो शिवलिंग लंबवत रूप से आपस में जुड़े हुए जो आपको कहीं और देखने को नहीं मिलेगा।

जुड़ी है मंदिर के पीछे कई मान्यताएं

इस मंदिर के विषय में बताया जाता है कि त्रेतायुग में महर्षि कश्यप और दनु के पुत्र शुंभ और निशुंभ ने घोर तपस्या कर एक-एक शिवलिंग को मिलाकर यहां स्थापित कर दिया था। घने जंगल होने की वजह से कालांतर में लोग मशाल लेकर इस शिवलिंग की पूजा करने आते थे और पूजा के बाद पलाश के पत्तों से शिवलिंग को ढक देते थे ताकि कोई इसे खंडित न करे। इस महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर की खासियत यह है कि यहां बलि देने की प्रथा नहीं है।

ऐतिहासिक, धार्मिक व पुरातात्विक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह कामना लिंग है जहां से कोई भी भक्त आज तक खाली हाथ वापस नहीं गया। जो भी सच्चे मन मन्नत मांगता है या मनोकामना करता है। उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। बताया जाता है कि झारखंड के इस प्राचीन मंदिर में भग्नावशेष यहां दबे हुए है। जिसके कारण इसका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी है। यहां की एक और मान्यता यह है कि यहां किसी तरह की तंत्र विद्या काम नहीं करती है।

शिव गंगा के बगल में है शमशान घाट

संताल परगना के साकलद्वीपी ब्राम्हणों का सबसे बड़ा गांव है धौनी। शुम्भेश्वरनाथ शिवगंगा के बगल में एक शमशान घाट है जहां केवल धौनी ग्राम के मृत ब्राम्हणों का दाह संस्कार किया जाता है। अन्य लोगों का दाह संस्कार यहां वर्जित है। उंचाई पर होने की वजह से शमशान घाट की राख पानी में बहते हुए यहां की शिवगंगा में आती है बताया जाता है कि हर रोज श्रृंगारी पूजा के बाद सर्वप्रथम यही का जल शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है।

कैसे पहुंचे इस मंदिर में

देवघर हैसडीहा नेशनल हाईवे 133 पर स्थित कोठिया से तीन किलोमीटर की दूरी पर ही शुम्भेश्वरनाथ मंदिर है। कोठिया से आसानी से छोटी गाड़ियां मिल जाती है। बासुकीनाथ से बैगणबरा होते हुए भी यहां आने का रास्ता है।

बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ से बड़ा है मंदिर का गुंबज

शुम्भेश्वरनाथ मंदिर का गुंबज बासुकीनाथ मंदिर और बैद्यनाथ धाम से भी उंचा है यहां का गर्भगृह बासुकीनाथ से काफी बड़ा है। इस मंदिर में त्रिशूल के बजाए पंचशूल स्थापित है। इस मंदिर के बगल में ब्रम्हनारायण और काल भैरव का मंदिर भी है। मंदिर के पास में ही प्राचीन शिव गंगा है।

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