शारदीय नवरात्रि में माता को लगाए 9 भोग, समस्याओं से मिलेगी मुक्ति जाने विस्तार से

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नवरात्रि पर्व पर माता की आराधना के साथ ही व्रत-उपवास और पूजन का विशेष महत्व है। जिस प्रकार नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।

उसी प्रकार से इस नौ दिनों में माता को प्रत्येक दिन के अनुसार भोग या प्रसाद अर्पित करने से देवी मां सभी प्रकार की समस्याओं का नाश करती है।

इस लेख के माध्यम से हम ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक बताए गए भोग का विस्तार से वर्णन करेंगे।

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नवरात्रि के पहले दिन यानि मां शैलपुत्री का दिन होता है। इस दिन देवी मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही सभी व्याधियां दूर होकर शरीर निरोगी रहता है।

दूसरा दिन नवरात्रि में मां ब्रम्हचारिणी का होता है। इस दिन देवी मां को शक्कर का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती है। इस भोग को देवी के चरणों में अर्पित करने के बाद परिवार के सदस्यों में बांटने से सभी की आयु में वृद्धि होती है।

तीसरा दिन मां चंद्रघंटा रूप की पूजा का है। इस दिन मां को दूध या दूध से बनी हुई मिठाई खीर का भोग लगाकर ब्राम्हणों को दान करना शुभ होता है। इससे दुखों की मुक्ति होकर परम आनंद की प्राप्ति होती है।

4था दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाने से देवी मां प्रसन्न होती हे। इस भोग को मंदिर के ब्राम्हण को दान करना चाहिए। ऐसा करने से बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय शक्ति बढ़ती है।

पंाचवा यानि की मां स्कंदमाता का दिन होता है। इस दिन माता जी को केले का नैवैद्य चढ़ाना बहुत उत्तम होता है। ऐसा करने से आपको उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी काया की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि के छठवें दिन देवी मां को शहद का भोग लगाना बहुत अच्छा माना जाता है। इस दिन शहद का भोग लगाने से मनुष्य की आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है। सातवें दिन देवी मां को गुड़ का भोग लगाए।

सातवें दिन नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवैद्य चढ़ाने व उसे ब्राम्हण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है। एवं आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा भी होती है।

आठवें दिन माता रानी को नारियल का भोग लगाएं और नारियल का दान भी करे। इससे संतान संबंधी सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और देवी मां की कृपा प्राप्त होती है।

नौवे दिन नवमीं की तिथि मां सिद्धिदात्री की पूजा का दिन होता है। इस दिन तिल का भोग लगाकर ब्राम्हण को दान दे। इससे मृत्यु भय से राहत मिलती है। साथ ही अनहोनी होने की घटनाओं से बचाव भी होगा।

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