हरेली के साथ होगी सोमवती अमावस्या बन रहा शुभ संयोग, जाने कैसे

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हरियाली अमावस्या को प्रदेश में हरेली पर्व के नाम से जानते है। 20 जुलाई को हरेली का पर्व मनाया जाएगा। इस बार हरेली का पर्व सोमवार के दिन पड़ है। हरेली के दिन अमावस्या की तिथि होगी। इस तरह से इस बार हरेली के दिन सोमवती अमावस्या का संयोग निर्मित हो रहा है। जो पूजन की दृष्टि से उत्तम माना गया है।
हरेली पर्व को प्रदेश का पहला त्योहार माना जाता है। मतलब इससे ही लोक पर्वों की शुरुआत होती है। हरेली का पर्व पूरी तरह से कृषि से संबंधित पर्व है। प्राचीन समय से ही कृषि का प्रारंभिक कार्य पूर्ण होने के बाद इस पर्व को मनाते हुए सभी कृषि उपकरणों की पूजा की जाती है। इस लेख के माध्यम से हम हरेली पर्व के विषय में मान्यताएं व पंरपरा को बताएंगे।

बन रहा है अच्छा संयोग

हरेली या हरियाली अमावस्या का पर्व सोमवार के दिन पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्य मनोज तिवारी ने बताया कि जब भी अमावस्या की तिथि सोमवार के दिन होती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते है। इस दिन पूजन करने से भगवान शंकर का भी आशीर्वाद मिलता है। साथ ही इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग, पुनर्वसु नक्षत्र, श्रावण सोमवार का विशेष संयोग बन रहा है।

कुलदेवी व देवता की पूजा

हरेली का पर्व श्रावण मास के अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन कृषि उपकरणों के साथ ही ग्रामिण अपने कुल देवी की पूजा-अर्चना करते है। माना जाता है कि साल भर में हरियाली अमावस्या के दिन कुल देवी का आह्वान कर पूजन करने से माता अपनी कृपा लोगों पर बनाए रखती है। इस दिन घर में विशेष रूप से चिला-चैसेला जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाकर गुड के साथ भोग अर्पित किया जाता है। साथ ही बुरी नजर से बचाए इस कामना से घर के दरवाजे पर किल ठोकते है और बीमारियों से मुक्ति के लिए नीम का पत्ता घर के मुख्य दरवाजे पर लगाया जाता है।

बन रहा पुष्य नक्षत्र का योग

पंडित मनोज तिवारी ने बताया कि हरियाली अमावस्या के दिन पुनर्वसु नक्षत्र के बाद रात्रि में सर्वार्थ सिद्धि योग भी है 16 सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है। रात्रि 9 बजकर 22 मिनट से पुष्य नक्षत्र रहेगा। सोमवार को पुष्य नक्षत्र को पुष्य सोम भी कहा जाता है।

गेंडी व नारियल की बाजी खेलने की परंपरा

इस पर्व में मुख्य रूप से कृषि के प्रारंभिक कार्य पूर्ण होने के बाद उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसलिए बच्चे-बड़े सभी नारियल की बाजी लगाते है मनोरंजन के लिए। वहीं बांस से गेंडी बनाकर उसमें चढ़कर पूरे गांव का भ्रमण करते है।

पूजे जाएंगे कृषि औजार

हल, गैती, कुदाल, फावड़ा, तसला, रापा जैसे कृषि उपकरणों को धोकर विधि-विधान से घर के लोग पूजा-अर्चना कर सदैव कृषि कार्य में सहयेाग के लिए धन्यवाद करेंगे। साथ ही कई तरह के पकवानों का भी आनंद लिया जाएगा।

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