सूर्य ग्रहण के कारण महाप्रभु का नवजीवन उत्सव मनेगा आज

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महाप्रभु जगन्नाथ स्नान पूर्णिमा से अस्वस्थ्य थे। जिनका उपचार मंदिर में पुजारी के द्वारा किया जा रहा था। मान्यतानुसार लगातार प्रभु को जड़ी-बूटी युक्त काढ़ा बनाकर पीलाया गया। भगवान का नवजीवन उत्सव आषाढ़ अमावस्या की तिथि को होता है। लेकिन इस बार सूर्य ग्रहण के चलते महाप्रभु का नवजीवन उत्सव अमावस्या के बजाए एक दिन आगे कर दिया गया।

रेलवे स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में हर साल रथयात्रा उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते उत्सव सादगी से मनाने का निर्णय लिया गया है। मंदिर के वरिष्ठ सदस्य केके बेहरा ने बताया कि इस उत्सव को पुरी जगन्नाथ मंदिर में बहुत ही अच्छे से मनाया जाता है। लेकिन इस बार वहां पर भी इसके लिए अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने बताया कि महाप्रभु जगन्नाथ का दर्शन अमावस्या के वजह से एक दिन बाद नवजीवन उत्सव होगा। इसके साथ ही महाप्रभु को ५६ भोग अर्पित किया जाएगा। भक्त एक बार फिर से महाप्रभु के दर्शन कर सकेंगे।

० महाप्रभु की दिनचर्या है मनुष्यों की तरह

महाप्रभु जगन्नाथ अपनी दिनचर्या मनुष्यों की तरह ही करते है। इसलिए साल में एक बार अस्वस्थ्य होते है उपचार कराते है और फिर मौसी मां गुंडिचा के घर रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करने के लिए निकलते है। इनके साथ भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा भी साथ होती है।

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