शिव की पूजा लिंग रूप में क्यों है फलदायी, जाने लेख में

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सावन माह महादेव को पूर्ण रूप से समर्पित मास माना गया है। सावन का दूसरा सोमवार 13 जुलाई को है। महादेव की पूजा मूर्त रूप के बजाए लिंग रूप अधिक होती है। बहुत कम ही मंदिर होंगे जहां पर भगवान शंकर का मूर्त रूप होगा। शिवालयो में महादेव की लिंग रूप की स्थापना करते हुए ही पूजा की जाती है। पुराणों के मुताबिक लिंग रूप में शिव पूजन का महत्व बताया गया है। इस लेख के माध्यम से हम महादेव के लिंग रूप की पूजा करने का महत्व बताएंगे। साथ ही महादेव के शिव लिंग के प्रकारों के विषय में जानकारी देंगे।


सावन का महीना शिवजी की पूजा और मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति का महीना माना जाता है। मान्यता है कि इस माह में की गई आराधना से भोले शंकर अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होते है और मनचाहा वर देते है। ऐसे में अगर आप सावन भर शिवजी की विशेष पूजा-पाठ करने में सक्षम नहीं है तो केवल सोमवार के दिन व्रत करके या फिर पूजा-अर्चना करके भोलेनाथ को प्रसन्न कर सकते है।

महादेव एक मात्र देव जिनकी लिंग रूप में होती है पूजा

देवों के देव महादेव ही एक मात्र ऐसे देव है जिनकी पूजा मूर्त रूप के बजाए लिंग रूप में अधिक फलदायी मानी गई है। यही कारण है कि मंदिरों में भगवान शिव लिंग रूप में विराजते है। शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्त इन्हीं की पूजा करते है। शिव लिंग पर जल अर्पित करने मात्र से महादेव की कृपा मिल जाती है।

तीन प्रकार के होते है शिव लिंग

शिव पुराण में शिवलिंग के विषय में विस्तार से बताया गया है। जिसमें शिवलिंग के तीन प्रकार बताए गए है। ये तीन प्रकार है उत्तम, मध्यम और अधम शिवलिंग। शिवलिंग के पहले प्रकार उत्तम शिवलिंग उसे कहते है जिसके नीचे वेदी बना हो और वह वेदी से चार अंगुर उंचा हो। इसे ही सबसे अच्छा यानी कि उत्तम शिवलिंग माना गया है। दूसरे प्रकार मध्यम शिवलिंग जो वेदी से चार अंगुर से कम होता है उसे मध्यम कोटि का शिवलिंग कहा जाता है। इसी तरह से तीसरे प्रकार के शिवलिंग को अधम कहा जाता है। जो मध्यम से भी कम होता है उसे अधम श्रेणी का माना गया है।

शिवलिंग की ऐसे करे पूजा

शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग की पूजा करते समय मुख सदैव उत्तर की ओर रहना चाहिए। क्योंकि पूर्व दिशा की ओर खड़े होकर या बैठकर शिवलिंग की पूजा करने से शिव के सामने का भाग बाधित होता है जो शुभफलदायी नहीं होता है। कहा जाता है कि उत्तर की ओर बैठकर या खड़े होकर पूजा करने से देवी पार्वती का अपमान होता है क्योंकि यह शिव का बायां भाग पड़ता है जो जहां देवी पार्वती का स्थान है। इसलिए दक्षिण दिशा में बैठकर सामने की ओर यानी उत्तर की ओर मुख करके शिवलिंग की पूजन करना चाहिए। ऐसे करने से जातक को माता पार्वती और भोलेनाथ की कृपा मिलती है।

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