विजय का प्रतीक है पाली का शिव मंदिर, शिल्पकला का अद्भूत नमूना

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प्रदेश में पुरातत्व व स्थापत्य कला से परिपूर्ण कई प्राचीन मंदिर है। जो इस प्रदेश के इतिहास को समृद्ध बनाते है। उन्हीं में से एक है कोरबा जिला के पाली स्थित शिव मंदिर। यह शिव मंदिर बहुत प्राचीन है। जिसे बाणवंश के राजा द्वारा बनवाया गया था। इतिहासकार बताते है कि इस मंदिर को राजा ने महादेव की पूजा के लिए बनवाया था। महादेव की महिमा प्राचीन काल में भी उतनी ही थी जितनी की आज है। महादेव की पूजा करने के उद्देश्य से इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। इस लेख के माध्यम से मंदिर के विषय में जानकारी दी जा रही है।


० राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था मंदिर को
पाली के इस शिव मंदिर का निर्माण बाणवंश के राजा विक्रमादित्य द्वितीय ने 870 से 900 ई. के मध्य में कराया था। राजाविक्रमादित्य को जयमेयू के नाम से भी जाना जाता है। इस बात की पुष्टि यहां के शिलालेख के द्वारा होती है। राजा विक्रमादित्य द्वितीय शिव भक्त थे और जब भी युद्ध के लिए जाते तो यहां पूजा अवश्य करते थे। यहां पूजा करने के बाद उन्हें कई बार विजय प्राप्त हुआ। इनके अलावा सोमवंशी व कल्चुरी वंश के राजाओं ने भी विजय प्राप्त किया था। इसलिए इसे विजय का प्रतीक माना जाता है।


० कल्चुरी शासक ने कराया जीर्णोद्धार
इस मंदिर का जीर्णोद्धार 200 वर्ष बाद रतनपुर के कल्चुरी वंश के राजा जाजल्यदेव ने कराया था। तब से मंदिर के अंदर ही श्रीमद् जाजल्यदेवस्य कीर्ति रिषम तीन जगहों पर खुदा मिलता है।
० शिल्पकला का अद्भूत नमूना
इस मंदिर में महादेव की पूजा से संबंधित चित्र ही है। कोई शिव की पूजा कर रहा तो कोई उन्हें जल अर्पित कर रहा। इसी तरह की कलाकृतियां मंदिर में बनी है। कला का अद्भूत नमूना यहां देखने को मिलता है।


० महादेव करते है मुराद पूरी
यहां स्थापित महादेव की तीन शिवलिंग है। जिनके दर्शन मात्र से ही मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर में पहुंचकर जल अर्पित करने से भक्तों के सभी दुख: दूर हो जाते है। सावन सोमवार, महाशिवरात्रि में यहां पर विशेष पूजन होता है।
० कैसे पहुंचे यहां
बिलासपुर से 50 किलोमीटर की दूरी पर कोरबा मार्ग पर यह मंदिर पाली नाम के गांव में है। यहां जाने के लिए बस आसानी से मिल जाता है। वहीं लोग दो पहिया व चार पहिया वाहन से भी जा सकते है।

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