रूठी हुई मां लक्ष्मी को मनाने के बाद ही महाप्रभु को मिला श्री मंदिर में प्रवेश, जाने कैसे

महाप्रभु जगन्नाथ रथयात्रा उत्सव के दौरान मौसी मां गुंडिचा के घर गए हुए थे। सात दिन तक मौसी के घर में रहने के बाद महाप्रभु जगन्नाथ के रथया़़त्रा की वापसी बाहुड़ा या़त्रा के साथ हुई। इसके साथ ही रथ यात्रा उत्सव का समापन हुआ। रथ यात्रा उत्सव के दौरान महाप्रभु की कई लीलाएं देखने को मिलती है। उन्हीं में से एक लीला है रूठी हुई महालक्ष्मी को मनाने का। देवशयनी एकादशी के पूर्व महाप्रभु का मंदिर में प्रवेश होता है। महालक्ष्मी प्रभु से रथयात्रा उत्सव में साथ नहीं ले जाने पर नाराज रहती है। श्री मंदिर आने पर महाप्रभु को पहले महालक्ष्मी को मनाना पड़ता है क्योंकि नाराज महालक्ष्मी प्रभु को अंदर आने ही नहीं देती है। इस लेख के माध्यम से हम प्रभु के द्वारा महालक्ष्मी को मनाने की लीला को बताएंगे।


0 भगवान जगन्नाथ पहुंचे श्री मंदिर
महाप्रभु जगन्नाथ रथयात्रा उत्सव से बाहुड़ा यात्रा के माध्यम से रथ पर भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ वापस लौटे। तब महालक्ष्मी ने भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा को तो मंदिर में प्रवेश करने दिया। लेकिन महाप्रभु को बाहर ही रोक दिया और दरवाजा बंद कर लिया।


0 ऐसे मनाया महाप्रभु ने महालक्ष्मी को
भगवान जगन्नाथ को मंदिर में आता देख मां महालक्ष्मी गुस्सा हो जाती है। महाप्रभु को अंदर प्रवेश नहीं मिला। तब महाप्रभु ने महालक्ष्मी को उपहार दिए। उपहार देते हुए उन्हें मनाने का प्रयास किया। पत्नी को खुश करने के लिए प्रभु ने नए वस्त्र-आभूषण के साथ रसगुल्ला खिलाया। महाप्रभु ने इस लीला से संदेश दिया है कि घर में पति-पत्नी में रूठना मनाना लगा रहता है। उस बात को

भूलना चाहिए और परिवार की खुशहाली के लिए जब भी लड़ाई हो दोनों में से किसी एक को शांत होना चाहिए और दूसरे की बात सुनकर उन्हें मना लेना चाहिए। इससे आपसी मनमुटाव दूर होता है साथ ही परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
0 इसलिए रूठी थी महालक्ष्मी
भगवान जगन्नाथ स्वस्थ्य होने के बाद माता लक्ष्मी को बिना बताए ही मौसी मां गुंडिचा के घर रथ पर सवार होकर भाई बलभद्र व बहन सुुभद्रा के साथ चले गए। नौ दिनों तक मंदिर में नहीं रहे। जिससे महालक्ष्मी प्रभु से नाराज थी उन्होंने महाप्रभु को श्री मंदिर आने का संदेश भी भेजा था लेकिन वे नहीं आए। इस वजह से महालक्ष्मी उनसे नाराज थी।

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