राभ भक्त हनुमान है भक्ति योग व परमार्थ के श्रेष्ठ उदाहरण, पढ़े पूरा लेख

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राम भक्त हनुमान के विषय में हर कोई जानता है। उन्होंने जिस तरह से भक्ति को परिभाषित किया है वह हर मनुष्य के लिए एक उदाहरण है। जब मनुष्य के हृदय में कोई डर या भय का भाव उत्पन्न होता है। तब भी राम भक्त हनुमान का ही स्मरण करने से समस्त विकार दूर हो जाते है। हनुमानजी ने सिर्फ भक्ति नहीं बल्कि परमार्थ का भी उदाहरण प्रस्तुत किया है। ऐसे ही उन्हें भगवान राम का परमभक्त नहीं कहा जाता है। वे भक्ति योग को सार्थक बनाने वाले भक्त है।
त्रेतायुग को बिते हजारों वर्ष बित गए है इसके बाद भी राम भक्त हनुमान आज भी हमारे बीच मौजूद है। हर व्यक्ति हनुमान की भक्ति करते हुए राम जी की स्तुति करता है। जीवन को सार्थक करने का सही मार्ग भी हनुमान ने ही बताया है। इस लेख के माध्यम से बताएंगे की आखिर किस तरह से हनुमान है भक्ति योग व परमार्थ के श्रेष्ठ उदाहरण।

दूसरों के लिए ही किया शक्ति का प्रयोग


हनुमान जी ने अपने जीवन में बल का प्रयोग सिर्फ दूसरों के भलाई के लिए ही की थी। पुराणों में वर्णन है कि राम भक्त हनुमान ने माता सीता की खोज के लिए कठिन परिश्रम किया। हनुमान ही एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने वायु मार्ग से माता सीता का पता लगाया। युद्ध के दौरान जब भगवान राम व अनुज लक्ष्मण को नाग पास से बांध लिया गया था तब भी गरूण देव को उन्होंने ही बुलाया। नागपास से मुक्त कराया। इसी तरह से जब मेघनाथ ने शक्ति अस्त्र से लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया था तब सुसैन वैद्य को लेकर आए और 24 घंटे में ही संजीवनी बूटी लाकर उनका रक्षण किया। इससे पूर्व वानर राज सुग्रिव को बाली से बचाने में लगे रहे। इसी तरह से कई उदाहरण है जो यह सिद्ध करते है कि हनुमान ने अपनी शक्ति का प्रयोग दूसरों के लिए ही किया।

भक्ति योग को आज भी रखा है जीवित


बजरंग बली को यू ही भगवान श्री राम का परम भक्त नहीं कहा जाता है। भगवत गीता में चार योग बताए गए है सांख्या योग, कर्म योग, ज्ञान योग व भक्ति योग। भक्ति योग का जीता जागता उदाहरण भगवान हनुमान है। उन्होंने अपना सर्वस्व श्री राम के लिए न्योछावर कर दिया। सोते जागते उठते बैठते हर समय उनके मुख श्री राम का नाम ही आता था। ऐसी भक्ति न तो किसी ने आज तक की है और नहीं कोई ऐसा भक्त हो पाएगा। भक्ति की शक्ति को हनुमान ने बताया है। उन्होंने भगवान राम से मिलने के लक्ष्य को अपनी इस भक्ति योग से ही प्राप्त किया है।

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भक्ति व परमार्थ का बताया महत्व



हनुमान जी ने एक भक्त के तौर पर सच्ची भक्ति का परिचय दिया है। साथ ही परमार्थ को महत्व देते हुए उन्होंने अपने बल का प्रयोग समाज की सेवा के तौर पर किया है। इसी तरह से यदि हर मनुष्य भी सच्ची भक्ति करे तो उन्हें परमात्म की प्राप्ति होगी। वहीं हम अपने बल का प्रयोग दूसरों की सहायता व भलाई के लिए करेंगे तो हमें भी परमार्थ की प्राप्ति होगी।

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