भगवान गणेश को क्यों कहते है एकदंत, जाने पूरी कथा

भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, लंबोदर जैसे कई नामों से जाना जाता है। इन नामों के पीछे कई कारण छिपे है। इन नामों में एक नाम एकदंत भी है। एक दंत का मतलब एक दांत वाले होता है। भगवान गणेश को एकदंत कहकर संबोधित किया जाता है। लेकिन एकदंत नाम क्यों और कैसे पड़ा इस विषय में कई कथाएं है। इस लेख के माध्यम से भगवान गणेश के एकदंत नाम पड़ने के पीछे का कारण बताएंगे।


भगवान गणेश के बिना किसी भी मांगलिक काम की शुरुआत नहीं हो सकती है पुराणों में वर्णन है कि पूजन हो या कोई भी शुभ कार्य भगवान गणेश के पूजन के बाद ही कार्य प्रारंभ होता है। सभी देवताओं में पूजनीय है उनके पूजन से सभी कार्य निर्विघ्न हो जाते है।


0 ऐसे बने गणेश एकदंत
भगवान गणेश के एक दंत होने के पीछे पुराणों में कई कथा का उल्लेख है। उन सब कथाओं में सबसे प्रचलित कथा शिवमहापुराण में प्राप्त है उसके मुताबिक भगवान गणेश व परशुराम की रोचक कथा है। इसके मुताबिक एक बार परशुराम भगवान शंकर से मिलने कैलाश पर्वत पहुंचे। तब वहां द्वार पर भगवान गणेश खड़े थे और उन्होंने परशुराम को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। परशुराम ने भगवान गणेश से विनती की कि उन्हें भगवान शंकर से मिलने दें। लेकिन गणेशजी

नहीं माने जिसके कारण क्रोध में आकर परशुराम ने भगवान गणेश को युद्ध की चुनौती दे दी। फिर भगवान गणेश व परशुराम के बीच युद्ध शुरू हो गया। युद्ध के दौरान परशुराम ने फरसे से वार करके गणेशजी का एक दांत तोड़ डाला। इसके बाद से ही गणेश को एकदंत कहा जाने लगा। इससे संबंधित एक कथा यह भी है कि बचपन में भाई कार्तिकेय के साथ भगवान गणेश की खूब लड़ाई होती थी। गणेश भगवान का चंचल व शरारती स्वभाव से कार्तिकेय को तंग करते थे एक दिन कार्तिकेय ने क्रोधित होकर गणपति की पिटाई कर दी। जिससे उनका एक दांत टूट गया। तभी से एक दंत कहलाए।

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