प्रतिदिन इस विधि से करे भगवान शिव की पूजा

भगवान शिव की पूजा का बड़ा ही महत्व है। एक लोटा जल चढ़ा देने से प्रसन्न होने वाले भगवान शिव की पूजा बड़ी-बड़ी बाधाओं को दूर कर देती है। तो आइए हम आपको बताते है कि प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा किस विधि से करे। भगवान भोलेनाथ के पूजन में इन विशेष ध्यान रखे। ज्योतिषाचार्य मनोज तिवारी के मुताबिक पूजन विधि सर्वप्रथम गणेश पूजन करे। भगवान गणेश को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करे। गंध, पुष्प, अक्षत अर्पित करे। अब भगवान शिव का पूजन शुरू करे। गृहस्थ जीवन में भगवान शिव की पारद प्रतिमा

का पूजन सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। सफेद आक या स्फटिक की प्रतिमा का पूजन से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है। सबसे पहले जिस मूर्ति में भगवान शिव की पूजा की जानी है। उसे अपने पूजा घर में स्थान दे। मूर्ति में भगवान शिव का आवाहन करे। भगवान शिव को अपने घर में सम्मान सहित स्थान दे। अब भगवान शिव को स्नान कराए। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं।


अब भगवान को वस्त्र पहनाएं। वस्त्रों के बाद आभूषण और फिर यज्ञोपवित अथवा जनेउ पहनाए। अब पुष्पमाला पहनाए। सुगंधित इत्र अर्पित करे। अब तिलक करे। तिलक के लिए अष्टगंध या चंदन का प्रयोग करे। अब धूप व दीप अर्पित करे। भगवान शिव को धतूरा, आक के फूल विशेष प्रिय है। बिल्बपत्र अर्पित करे। 11 या 21 चावल अर्पित करे। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीप जलाए।


0 पूजन सामग्री
देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा दूध, अर्पित किए जाने वाले वस्त्र यदि वस्त्र न हो तो कलावा या मौली धागा भी प्रभु को अर्पित कर सकते है। चावल, अष्टगंध, दीपक तेल, रूई, धूपबत्ती, चंदन, धतूरा, अकुआ के फूल, बिल्बपत्र, जनेउ, फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, पान, दक्षिणा में से जो भी हो।


0 ऐसे करे पूजा
पूजा प्रारंभ करते समय सबसे पहले संकल्प ले। संकल्प लेते समय हाथ में पुष्प चावल व जल ले। फिर अपना नाम व तिथि पूजन का कारण यदि मनोरथ है तो उसे भी बोले। फिर सब प्रभु के समक्ष अर्पित करे। इसके बाद प्रभु का आवाहन करे पंचाक्षरी मंत्र जाप करे। फिर आसन पर बैठकर पूजन शुरू करे। अभिषेक, श्रृंगार, प्रसाद का भोग अर्पित करे फिर आरती करे। पूजन के अंत में क्षमा याचना अवश्य ही करे।

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