पापों से मुक्ति के लिए कामिका एकादशी व्रत है श्रेष्ठ, पढ़े पूरी कथा

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सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी या कामदा एकादशी कहा जाता है। साल भर में 24 एकादशी होती है और जब भी अधिकमास होता है तब इसकी संख्या 26 हो जाती है। भगवान श्री हरि विष्णु का एकादशी की तिथि प्रिय हैं। इस तिथि में उनकी पूजा व व्रत करने से भक्तों को उनकी कृपा मिलती है। इस लेख के माध्यम से कामिका एकादशी के विषय में बताएंगे।
16 जुलाई 2020 को सावन मास में कामिका एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस दिन व्रत करने से जीवात्माओं को उनके पापों से मुक्ति मिलती है। एकादशी के सभी व्रतों में से कामिका एकादशी को भगवान विष्णु का उत्तम व्रत माना जाता है। ज्योतिषाचार्य मनोज तिवारी ने बताया कि कामिका एकादशी उपासकों के कष्ट दूर करती है और उनकी इच्छा पूरी करती है।

कामिका एकादशी व्रत

कामिका एकादशी का महत्व

कामिका एकादशी का व्रत करने से सबके बिगड़े काम बन जाते है। विशेष रूप से इस तिथि में विष्णु जी की पूजा-अर्चना करना अत्यंत लाभकारी माना गया हैं। व्रत के फलस्वरूप भगवान विष्णु की पूजा से उपासकों के साथ उनके पित्रों के भी कष्ट दूर हो जाते है। उपासक को मोक्ष प्राप्ति होती है। इस दिन तीर्थस्थानों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।
यह भी मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान विष्णु जी पूजा करने से सभी गंधर्वों और नाागों की भी पूजा हो जाती है। श्री विष्णुजी को यदि संतुष्ट करना हो तो उनकी पूजा तुलसी पत्र से करें। ऐसा करने से ना केवल प्रभु प्रसन्न होंगे बल्कि आपके भी सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। कामिका एकादशी व्रत की कथा सुनना यज्ञ करने के समान है।

व्रत व पूजा विधि

एकादशी तिथि पर स्नानादि से निवृत्त होकर पहले संकल्प ले और श्री विष्णु के पूजन-क्रिया को प्रारंभ करे। प्रभु को फूल-फल, तिल, दूध पंचामृत आदि निवेदित करे। आठों पहर व्रत रहकर भगवान विष्णु का स्मरण करे व भजन-कीर्तन करे। इस दिन ब्राम्हण भोज एवं दान-दक्षिणा सहित विदा करने के बाद ही भोजन ग्रहण करे। विष्णु सहस्त्रनाम का जाप अवश्य करे। इस प्रकार विधिनुसार जो भी कामिका एकादशी का व्रत रखता है उसकी कामनाएं पूर्ण होती है।

कामिका एकादशी व्रत की कथा

महाभारत काल में एक समय में कुंतीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण ने कहा कि हे भगवन कृपा करके मुझे श्रावण कृष्ण पक्ष एकादशी का नाम और महत्व बताइए। श्रीकृष्ण ने कहा कि हे युधिष्ठिर इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रम्हाजी भी देवर्षि नारद से कह चुके है। अतः मैं भी तुमसे वहीं कहता हूं। नारदजी ने ब्रम्हाजी से श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की इच्छा जताई थी। उस एकादशी का नाम, विधि और महत्व जानना चाहा। ब्रम्हा ने कहा हे नारद श्रावण मास के कृष्ण पक्ष एकादशी का नाम कामिका एकादशी है इस एकादशी व्रत को सुनने मात्र से यज्ञ का फल मिलता है। इस तिथि पर शंख, चक्र एवं गदाधारी श्री विष्णुजी का पूजन होता है। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। गंगा, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर में स्नान

करने में जो फल मिलता है। वह फल विष्णु भगवान के पूजन से भी मिलता है। सूर्य व चंद्र ग्रहण के समय कुरूक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, भूमि दान करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में आने के समय गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी जो फल प्राप्त नहीं होता वह प्रभु भक्ति और पूजन से प्राप्त होता है। पाप से भयभीत मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। एकादशी व्रत से बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। स्वयं प्रभु ने कहा है कि कामिका व्रत से कोई भी जीव कुयोनि में जन्म नहीं लेता। जो इस एकादशी पर श्रद्धा-भक्ति से भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पण करते है वे इस समस्त पापों से दूर रहते ह। हे नारद मैं स्वयं श्री हरि की प्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूं। तुलसी के दर्शन मात्र से ही मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते है। इसके स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है।

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