चंद्रपुर में विराजमान है आदि शक्ति मां चंद्रहासिनी, जाने मंदिर का इतिहास

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प्रदेश में शिव व शक्ति की कृपा ऐसी है कि यहां पर आदि शक्ति व भोलेनाथ दोनों के कई मंदिर है। इन मंदिरों का इतिहास भी बहुत पुराना है। इन्हीं में से एक मंदिर है च्रंद्रपुर नामक गांव में विराजमान मां चंद्रहासिनी देवी का मंदिर। माता के इस मंदिर में भक्तों की विषेश आस्था है। जिसके कारण साल भर यहां पर भक्त देवी मां के दशर्न व पूजन के लिए आते है। इस मंदिर के निर्माण से लेकर मंदिर में देवी मां के स्वरूप से संबंधित सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से जाने।


प्रदेश के रायगढ़ से लगभग 27 किलोमीटर दूरी पर चंद्रपुर में महानदी के तट पर एक बड़ा भव्य मंदिर है मां चंद्रहासिनी का। पौराणिक व धार्मिक कथाओं की झांकियां मंदिर परिसर में है। जिसमें समुद्र मंथन, भगवान विश्णु का शेषनाग कि सैया पर विश्राम करते जैसे कई सुंदर झांकियां है। प्रकृति की सुंदरता के बीच बने इस सुंदर मंदिर की महिमा अपार है। यहां पर देवी मां के सुंदर रूप का दर्शन कर भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। महानदी व मांड नदी के तट पर सुंदर प्रकृति को भी दर्शाती है।


0 चंद्रमा की आकृति के कारण पड़ा नाम
मान्यता है कि देवी मां का मुख चंद्रमा की आकृति जैसा होने कारण ही इन्हे चंद्रहासिनी और चंद्रसेनी मां के नाम से जाना जाता है। कहते है एक बार चंद्रसेनी देवी सरगुजा की भूमि को छोड़कर उदयपुर और रायगढ़ होते हुए चंद्रपुर में महानदी के तट पर आ गई। महानदी की पवित्र षीतल धारा से प्रभावित होकर माता रानी विश्राम करने लगी; जिसके बाद उन्हें नींद आ गई। वर्शों व्यतीत हो जाने पर भी उनकी नींद नहीं खुली। तब एक बार संबलपुर के राजा की सवारी यहां से गुजरी और अनजाने में उनका पैर चंद्रसेनी देवी को लगी। जिससे उनकी नींद खुल गई। फिर एक दिन स्वप्न में देवी ने उन्हें दर्षन दिया और यहां मंदिर के निर्माण और मूर्ति की स्थापना का निर्देश दिया। सिद्ध पीठ मां चंद्रहासिनी का तब राजा ने सुंदर मंदिर बनवाया और माता की पूजा इस क्षेत्र में षुरू हुई। आज यह क्षेत्र बहुत विख्यात है।


0 कैसे पहुंचे चंद्रपुर
यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालु रेलमार्ग से रायगढ या खरसिया स्टेशन में उतरकर बस या अन्य वाहनों से माता के दरबार पहुंच सकते है। इसके अलावा जांजगीर-चांपा, सक्ति, सांरगढ़, डभरा से चंद्रपुर जाने के लिए बस मिल जाती है।

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