एकादशी की तिथि को क्यों नहीं अर्पित किया जाता श्री हरि को चावल, जाने इस लेख में

2

एकादशी की तिथि प्रभु श्री हरि विष्णु को अति प्रिय है। इस दिन व्रत कर प्रभु की पूजा करने वालों को उनकी कृपा मिलती है। साथ ही सभी कष्टों का निवारण व पापों से मुक्ति मिलती है। एकादशी की तिथि में व्रत करने व पूजन करने वाले प्रभु को पुष्प, पंचामृत, फल, मिष्ठान सहित कई तरह की चीजें अर्पित करते है लेकिन इस दिन चावल प्रभु को अर्पित नहीं किया जाता है। इस दिन चावल को वर्जित माना जाता है। इस लेख के माध्यम से हम बताएंगे की आखिर एकादशी की तिथि को चावल क्यों नहीं अर्पित किया जाता हैं।

यह है पौराणिक कथा

प्रचलित पौराणिक कथा के मुताबिक माता के क्रोध से रक्षा के लिए महर्षि मेधा ने देह त्याग दिया था। उनके शरीर का अंश भूमिक में समा गया। कालांतर में वहीं अंश जौ एवं चावल के रूप में भूमि से उत्पन्न हुआ। कहा जाता है कि जब महर्षि की देह भूमि में समाई उस दिन एकादशी थी। इसलिए प्राचीन काल से ही यह परंपरा शुरु हो गई कि एकादशी के दिन चावल एवं जौसे बने भोज्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसलिए एकादशी के दिन इन पदार्थों का सेवन महर्षि की देह के सेवन के समान माना गया है। एकादशी के दिन शरीर में जल की मात्रा जितनी कम रहेगी। व्रत पूर्ण करने में उतनी ही सात्विकता रहेगी। आदिकाल में देवर्षि नारद ने एक हजार साल तक एकादशी का निर्जला व्रत करके नारायण भक्ति प्राप्त की थी। इसे प्रभु श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

इन चीजों को अर्पित करे श्री हरि विष्णु को

भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा एकादशी के दिन करते हुए मनुष्य समस्त पापों से मुक्ति की कामना करता है। इस दिन पूजन करने पर भगवान विष्णु को कुछ प्रमुख चीजे अवश्य ही अर्पित करे। भगवान का पंच द्रव्य यानी दूध, दही, घी, शहद व गंगा जल से स्नान या अभिषेक कराए। फिर पीला वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार पुष्पों से करे। पुष्पों में पारिजात, कमल, केवड़ा, अपराजिता, मालती जैसे पुष्प या जो भी पुष्प आपके पास हो अवश्य अर्पित करे। चंदन या गोरोचन उनको लगाए। अक्षत व तिल भी अवष्य ही अर्पित करे। इसके बाद उन्हे भागे में पंचामृत, सूजी का हलवा, तुलसी का पत्ता, केला, श्रीफल अर्पित करे।

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here