ईश्वर हमेशा से ही बनाए रखते है संतुलन, नहीं करते है पक्षपात, पढ़े लेख

हर युग में जब-जब भगवान धरती पर अवतरित होते है तब सभी देवी-देवता उनका साथ देते है। चाहे वह सतयुग हो, त्रेतायुग हो या द्वापर युग हर बार देवताओं की उपस्थिति व सहभागिता देखने को मिली है। भगवान भी सहयोग करने वाले देवताओं के साथ कभी भी पक्षपात नहीं करते है। अक्सर देवताओं में भी वचस्र्व की लड़ाई देखने को मिलती है। जिसमें दो प्रमुख देव का आपसी द्वंद देखने को मिला है। वह दो देवता है देवराज इंद्र व ग्रहों के राजा माने जाने वाले सूर्य देव। इस लेख के माध्यम से हम विस्तार से इसकी जानकारी देंगे।


त्रेतायुग में सूर्य देव व इंद्रदेव के पुत्रों का द्वंद देखने को मिला था। इसमें बाली इंद्र का पुत्र था तो सुग्रिव सूर्य देव का पुत्र था। इन दोनों में जब द्वंद हुआ तो इंद्र देव के पुत्र को पराजय मिली थी और सूर्य देव के पुत्र को राज्य मिला था। इसी तरह से द्वापर युग में महाभारत के दौरान सूर्य पुत्र कर्ण व इंद्र पुत्र अर्जुन का द्वंद देखने को मिला था। जिसमें युद्ध के दौरान सूर्य पुत्र कर्ण को पराजय मिला और अर्जुन विजयी हुए। इसी तरह से ऐसी कई घटनाएं है जहां पर देवताओं के पुत्रों को जय व पराजय का सामना करना पड़ा है।


0 भगवान राम का साथ देने वाले देवता
भगवान विष्णु जब त्रेतायुग में श्री राम के रूप में धरती पर अवतरित हुए थे तब उन्होंने रावण का वध किया था। रावण जैसे पराक्रमी राक्षस के साथ युद्ध में भगवान राम की सहायता देवताओं ने अपने पुत्रों के माध्यम से की थी। इसमें सबसे श्रेष्ठ उदाहरण है वायु देव के पुत्र हनुमान। जिन्होंने न सिर्फ साथ दिया बल्कि राम के महाभक्त बने। इसी तरह से ब्रम्हा का पुत्र जामवंत, इंद्र देव का नाती अंगद, भगवान विश्वकर्मा का पुत्र नल, अग्नि देव के पुत्र नील, कुबेर का पुत्र गंधमादन, अष्विनी कुमार के पुत्र मैंन्द और द्विविद्, राम के अनुज लक्ष्मण शेषनाग, वरुण देव का पुत्र सुसैन, शरभ परजन्य देव का पुत्र इसी तरह से सभी देवताओं के पुत्रों ने भगवान राम का युद्ध में साथ दिया और विजयश्री प्राप्त की।


0 श्रीकृष्ण का साथ देने वाले देवता
द्वापर युग में महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना के लिए पांडु पुत्रों का साथ दिया। इसमें पांडवों में से युधिष्ठिर देवता धर्मराज का पुत्र, भीम वायु देव का पुत्र, अर्जुन इंद्र देव का पुत्र, नकुल व सहदेव अष्विनी कुमार के पुत्र थे। इन्होंने कौरवों को युद्ध में पराजित कर विजयश्री हासिल की।


0 ऐसे बनाया संतुलन
भगवान ने देवताओं में पक्षपात न हो इसका पूरा ध्यान रखा। इसलिए त्रेतायुग में सूर्य देव के पुत्र विजयी हुए तो वहीं द्वापर युग में महाभारत में इंद्र देव के पु़त्र अर्जुन को विजय प्राप्त हुई। इस तरह से इंद्र देव व सूर्य देव के द्वंद को नहीं बढ़ाया बल्कि उनके बीच में आपसी संतुलन बनाया।

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